अब पुतिन भी लगवाएंगे रूसी स्पूतनिक वी वैक्सीन का टीका, दी औपचारिक मंजूरी

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मॉस्को
रूस में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते प्रकोप के बीच राष्ट्रपति को भी वैक्सीन की डोज दी जाएगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने खुद को स्पुतनिक वी वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी है। जिसके बाद वैक्सीन को लगाए जाने से पहले की सभी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। बता दें कि दिसंबर से रूस ने स्पुतनिक वैक्सीन के स्वैच्छिक वैक्सीनेशन प्रोग्राम को शुरू किया था।

स्पुतनिक की तारीफ में पुतिन ने पढ़े कसीदे
पुतिन ने स्पुतनिक वी वैक्सीन की तारीफ करते हुए उसे प्रभावी और सुरक्षित बताया है। उन्होंने कहा कि मुझे कोई ऐसा कारण नहीं दिखाई देता जिससे मुझे यह वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मैं कोरोना वैक्सीन का इंतजार कर रहा हूं। 11 अगस्त को भी स्पुतनिक वी वैक्सीन के लॉन्चिंग के दिन पुतिन ने इसकी तारीफ करते हुए सुरक्षित बताया था।

बुजुर्गों पर भी वैक्सीन के कारगर होने का दावा
कुछ ही दिन पहले रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐलान किया था कि उसकी कोरोना वायरस वैक्सीन बुजुर्गों पर भी कारगर है। जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर 60 साल के अधिक उम्र के लोगों को सोमवार से वैक्सीनेशन के लिए आवेदन करने को कहा है। जिसके बाद से इस वैक्सीन को अब बुजुर्गों को भी देने की शुरूआत की जाएगी।

92 फीसदी प्रभावी है यह वैक्सीन
स्पुतनिक वी को बनाने वाली कंपनी गामलेया रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने बताया था कि वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के डेटा के तीन फाइनल कंट्रोल पॉइंट एनालिसिस करने के बाद यह रिजल्ट सामने आया है। पहले कंट्रोल पॉइंट में वैक्सीन का 92 फीसदी प्रभाव दिखा, जबकि दूसरे कंट्रोल पॉइंट में यह आंकड़ा 91.4 फीसदी आया। वैक्सीन ने कोरोना वायरस के गंभीर मामलों के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रभावकारिता दिखाई है। कंपनी के अनुसार, वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल का डेटा जल्द ही प्रतिष्ठित साइंस जर्नल्स में प्रकाशित किया जाएगा।

कैसे काम करती है रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन
रूस की वैक्सीन सामान्य सर्दी जुखाम पैदा करने वाले adenovirus पर आधारित है। इस वैक्सीन को आर्टिफिशल तरीके से बनाया गया है। यह कोरोना वायरस SARS-CoV-2 में पाए जाने वाले स्ट्रक्चरल प्रोटीन की नकल करती है जिससे शरीर में ठीक वैसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा होता है जो कोरोना वायरस इन्फेक्शन से पैदा होता है। यानी कि एक तरीके से इंसान का शरीर ठीक उसी तरीके से प्रतिक्रिया देता है जैसी प्रतिक्रिया वह कोरोना वायरस इन्फेक्शन होने पर देता लेकिन इसमें उसे COVID-19 के जानलेवा नतीजे नहीं भुगतने पड़ते हैं। मॉस्को की सेशेनॉव यूनिवर्सिटी में 18 जून से क्लिनिकल ट्रायल शुरू हुए थे। 38 लोगों पर की गई स्टडी में यह वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। सभी वॉलंटिअर्स में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी भी पाई गई।

रूसी कोरोना वैक्सीन पर लोगों को शक भी
प्रायोगिक परीक्षण के सभी चरण को पूरा नहीं करने के लिए रूस को आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है। देश और विदेश के विशेषज्ञों ने रूसी टीका के मूल्यांकन का काम पूरा होने तक इसके व्यापक इस्तेमाल करने के खिलाफ आगाह भी किया है। वहीं, रूस ने सुझावों की उपेक्षा करते हुए अग्रिम मोर्च पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों समेत जोखिम वाले समूहों को टीका देना जारी रखा है।



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