अमेरिका की चेतावनी से डरा पाकिस्तान, इमरान खान ने डेनियल पर्ल के हत्यारों की रिहाई रोकी

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इस्लामाबाद
अमेरिका की चेतावनी से डरे ने पत्रकार के हत्यारों की रिहाई पर रोक लगा दी है। जिसके बाद पाकिस्तान की सिंध प्रांत की सरकार ने ब्रिटेन में जन्मे अलकायदा आतंकवादी और उसके तीन सहयोगियों को रिहा नहीं करने का निर्णय किया है। बता दें कि पाकिस्तानी कोर्ट के आदेश पर ट्रंप प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे चिंताजनक करार दिया था।

आनन-फानन में रिहाई पर लगाई गई रोक
सिंध प्रांत की सरकार ने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए इन चारों को रिहा नहीं करने का फैसला किया है। सिंध हाईकोर्ट के दो सदस्यों की पीठ ने गुरुवार को सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया कि शेख और अन्य आरोपियों को किसी तरह की हिरासत में नहीं रखें। कोर्ट ने उनकी हिरासत को लेकर सिंध सरकार की सभी अधिसूचनाओं को अमान्य करार दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि चारों व्यक्तियों को हिरासत में रखना अवैध है।

सिंध हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर क्या कहा?
बहरहाल, सरकार के फैसले के बाद सिंध हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी हिरासत के बारे में रोक लगाने का आदेश दिया है, तो उन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए। पाकिस्तानी मीडिया एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश के अनुसार सिंध प्रांत की सरकार उनको रिहा नहीं करेगी। बता दें कि सिंध प्रांत में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है।

रिहाई पर अमेरिका ने क्या कहा था
पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारों की रिहाई की खबर पर अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि हम डेनियल पर्ल की हत्या के लिए जिम्मेदार कई आतंकवादियों को रिहा करने के सिंध उच्च न्यायालय के 24 दिसंबर के आदेश की खबरों से चिंतित हैं। हमें आश्वासन दिया गया है कि अभियुक्तों को इस समय रिहा नहीं किया गया है। अमेरिका इस मामले में किसी भी घटनाक्रम की निगरानी करता रहेगा और साहसी पत्रकार के रूप में पर्ल की विरासत का सम्मान करते हुए उनके परिवार को समर्थन जारी रखेगा।

पर्ल मामले में शुरू से पाकिस्तान पर सख्त रहा है अमेरिकाबता दें कि अमेरिका पर्ल के लिए न्याय की मांग को लेकर पाकिस्तान पर दबाव देता रहा है। डेनियल पर्ल के अभिभावकों- रूथ और जूडी पर्ल- ने सिंध हाईकोर्ट के फैसले की निंदा की थी। समाचार पत्र एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, उन्होंने भरोसा जताया कि पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय से उनके बेटे को न्याय मिलेगा तथा प्रेस की स्वतंत्रता की सर्वोच्चता बहाल होगी।

इसलिए की गई पर्ल की हत्या
अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख पर्ल (38) को 2002 में अगवा कर लिया गया था और उनका सिर कलम कर दिया गया था। यह घटना उस वक्त हुई थी जब वह पाकिस्तान में खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन अलकायदा के बीच जुड़ाव पर खबरों के लिए काम कर रहे थे।



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