मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद अब शीतकालीन सत्र… क्या नेपाली संविधान को ठेंगा दिखा रहे पीएम ओली?

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काठमांडू
को भंग कर फंसे प्रधानमंत्री के ऊपर अब संविधान के खिलाफ जाने का आरोप लग रहा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री होते हुए संविधान के विपरीत अपने मंत्रिमंडल में बदलाव किया है। इतना ही नहीं, देश में जारी राजनीतिक उठापठक और सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश का परवाह नहीं करते हुए उन्होंने एक जनवरी को संसद के उच्च सदन का शीतकालीन सत्र बुलाने की सिफारिश की है।

संसद भंग करने पर सुप्रीम कोर्ट का कारण बताओ नोटिस
नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने भी शुक्रवार को संसद को अचानक भंग करने के को लेकर ओली को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे रविवार तक अचानक लिए गए निर्णय पर लिखित स्पष्टीकरण जमा करने को कहा है। दरअसल बिना संवैधानिक संकट के नेपाल के संविधान में संसद के निचले सदन को भंग करने का अधिकार ही नहीं है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी के कार्यालय को भी नोटिस जारी किया है।

कार्यवाहक पीएम होते हुए कैबिनेट में किया बदलाव
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद भी पीएम ओली नहीं रुके। उन्होंने संसद भंग करने के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री होते हुए भी शुक्रवार शाम को अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल की। जबकि, कार्यवाहक प्रधानमंत्री होने के कारण उन्हें नेपाली संविधान के अनुसार अपने मंत्रिमंडल को बदलने का अधिकार ही नहीं है। उन्होंने शुक्रवार को 8 नए मंत्रियों को अपनी कैबिनेट में शामिल किया। जिनमें से पांच तो उनके धुर विरोधी पुष्प कमल दहल प्रचंड के समर्थक बताए जा रहे हैं।

नेपाली संविधान विशेषज्ञ ने भी माना असंवैधानिक कृत्य
नेपाली मीडिया काठमांडू पोस्ट ने संविधान विशेषज्ञ और वरिष्ठ वकील चंद्रकांता ज्ञवाली के हवाले से लिखा कि ओली इस समय नए प्रधानमंत्री के चुनाव तक कार्यवाहक की भूमिका में हैं। ऐसे में उनके पास यह अधिकार ही नहीं है कि वे कैबिनेट में फेरबदल करें। ओली के मंत्रिमंडल में शामिल इन पांच मंत्रियों बहादुर रायमाझी, प्रभु साह, मणि थापा, गौरी शंकर चौधरी और दया लामा को प्रचंड खेमे का माना जाता है।

अब संसद के उच्च सदन का शीतकालीन सत्र बुलाने की सिफारिश
पीएम ओली ने एक जनवरी को संसद के उच्च सदन का शीतकालीन सत्र बुलाने की सिफारिश की है। शुक्रवार शाम हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रपति से एक जनवरी को उच्च सदन नेशनल असेंबली का सत्र बुलाने की सिफारिश किए जाने का निर्णय किया गया। ओली की सिफारिश पर गत रविवार को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी द्वारा प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने तथा मध्यावधि चुनाव की तारीखों की घोषणा किए जाने के बाद नेपाल में राजनीतिक संकट गहरा गया है।



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