चीनी सेना के कब्‍जे का खतरा, परमाणु बम बनाने की राह पर बढ़ सकता है ताइवान

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ताइपे
दक्षिण चीन सागर में चीन की सेना के बढ़ते जमावड़े से ताइवान पर हमले का खतरा मंडराने लगा है। यही नहीं हॉन्‍ग कॉन्‍ग में चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के इशारे पर की गई बर्बरता को न केवल ताइवान बल्कि पूरी दुनिया में देखा गया। चीनी सेना PLA के हमले बढ़ते खतरे के बीच अब आशंका जताई जा रही है कि ताइवान आत्‍मरक्षा के लिए परमाणु बम बनाने का रास्‍ता अख्तियार कर सकता है।

एशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉन्‍ग कॉन्‍ग में दुनिया ने चीन की आक्रामक कार्रवाई को देखा और ब्रिटेन के साथ किए हुए वादे को भी टूटते हुए देखा। चीन ने हॉन्‍ग कॉन्‍ग में मानवाधिकारों और अभिव्‍यक्ति की आजादी को कुचल कर रख दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉन्‍ग कॉन्‍ग में इस कार्रवाई से चीन को कुछ भी हासिल नहीं हुआ बल्कि विश्‍वभर में उसकी छवि बहुत खराब हो गई।

संस्‍था रिअल क्लियर डिफेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार ताइवान के कई लोगों का मानना है कि हॉन्‍ग कॉन्‍ग में हुई बर्बर कार्रवाई ने एक आइना दिखाया कि अगर चीन ने ताइवान को मुख्‍यभूमि से जोड़ लिया तो तब क्‍या हो सकता है। यही वजह है कि ताइवान में चीन के साथ एकीकरण का समर्थन करने वाले लोगों की संख्‍या सबसे कम हो गई है। ताइवान के करीब 90 फीसदी लोगों ने इसका विरोध किया है।

ताइवान के परमाणु हथियार ही चीन की आंख खोलेंगे
चीन के इसी खतरे से निपटने के लिए अब ताइवान में चर्चा जोर पकड़ रही है कि उसे अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को फिर से शुरू करना चाहिए। कहा जा रहा है कि परमाणु हथियार ही चीन की आंख खोलेंगे और वह ध्‍यान देगा। रिअल क्लियर डिफेंस ने कहा कि दो साल पहले चीनी राष्‍ट्रपति ने कहा था कि अगर ताइवान शांति के साथ चीन के साथ नहीं जुड़ा तो उसे ताकत के बल पर जोड़ा जाएगा।

इसके बाद से चीनी सेना लगातार आक्रामक व्‍यवहार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बनाने में सफल हो जाता है तो यह आत्‍मरक्षा की दिशा में गेमचेंजर साबित हो सकता है। परमाणु हथियार संपन्‍न ताइवान पीएलए के हमले की सूरत में कई चीनी शहरों को तबाह कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1970 के दशक में ताइवान ने अपने परमाणु हथियारों के लिए प्‍लूटोनियम पैदा किया था।

ताइवान में पहले से ही दो परमाणु प्‍लांट मौजूद
अमेरिका के दबाव में वर्ष 1976 में ताइवान ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ दिया था लेकिन खुफिया तरीके से वर्ष 1980 के दशक तक यह जारी रहा। उन्‍होंने न्‍यूक्लियर रिएक्‍शन में सफलता हासिल कर ली थी। ताइवान पहले ही एक अविकसित परमाणु ताकत है। उसे प्‍लूटोनियम की मौजूदगी और तकनीकी क्षमता को देखते हुए परमाणु बम बनाने में ज्‍यादा समय नहीं लगेगा। ताइवान में पहले से ही दो परमाणु प्‍लांट मौजूद हैं जो प्‍लूटोनियम पैदा कर सकते हैं।

ताइवान इजरायल से सीख लेते हुए आत्‍मरक्षा के लिए गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार कार्यक्रम शुरू कर सकता है। इजरायल आज एक बड़ी परमाणु ताकत है और उसके पास कम से कम 80 परमाणु बम हैं। इतिहास भी बताता है कि अगर ताइवान के पास परमाणु हथियार आ जाएंगे तो चीन की उसके प्रति आक्रामकता कम हो सकती है। हालांकि ताइवान की वर्तमान राष्‍ट्रपति देश में परमाणु विरोधी अभियान चला रही हैं लेकिन अगर अस्तित्‍व पर संकट आया तो वह परमाणु हथियार बनाने की ओर बढ़ सकती हैं।



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