नेपाली संसद को भंग करने का ओली का फैसला सही या गलत? संविधान पीठ करेगी सुनवाई

स्टोरी शेयर करें



काठमांडू
नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने संसद भंग करने के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के फैसले के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को बुधवार को संविधान पीठ के पास भेज दिया। प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र एसजे बी राणा की एकल पीठ ने प्रतिनिधि सभा को भंग करने के खिलाफ दायर 12 अलग-अलग याचिकाओं पर आरंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। संविधान पीठ याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई शुरू करेगी। इस संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश राणा करेंगे तथा चार अन्य न्यायाधीशों का वह चुनाव करेंगे।

अंतरिम आदेश जारी करने से कोर्ट का इनकार
याचिकाकर्ताओं ने फैसले के खिलाफ अंतरिम आदेश का भी अनुरोध किया लेकिन शीर्ष अदालत ने ऐसा कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। ‘माय रिपब्लिका’ अखबार के मुताबिक नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाले खेमे के नेताओं ने निर्वाचन आयोग का रूख कर कहा है कि पार्टी में उनके पास दो तिहाई बहुमत है इसलिए चुनाव आयोग द्वारा उन्हें आधिकारिक तौर पर मान्यता देना चाहिए।

पार्टी पर हक साबित करने में जुटे दोनों खेमे
पार्टी की स्थायी कमेटी के सदस्य लीलामणि पोखरेल के हवाले से अखबार ने कहा कि हम यहां यह साबित करने आए हैं कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पर हमारा हक है। पोखरेल ने कहा कि उनके खेमे को बहुमत हासिल है और पार्टी की केंद्रीय समिति के 315 सदस्यों के दस्तखत हैं। चुनाव आयोग से आधिकारिक तौर पर मान्यता के लिए खेमे को पार्टी के भीतर बहुमत, सदस्यों के हस्ताक्षर, उनके विवरण जमा करने होंगे।

पार्टी ने ओली को अध्यक्ष पद से हटाया
पार्टी के प्रचंड खेमे की केंद्रीय कमेटी ने मंगलवार को बैठक कर ओली को अध्यक्ष पद से हटा दिया और प्रतिनिधि सभा को असंवैधानिक रूप से भंग करने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया। केंद्रीय कमेटी ने वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल को पार्टी का दूसरा अध्यक्ष चुना। प्रचंड पार्टी के पहले अध्यक्ष हैं।

रविवार को भंग हुई थी नेपाल की संसद
प्रधानमंत्री ओली ने रविवार को संसद भंग करने का प्रस्ताव भेजा और राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने इसे मंजूर कर लिया। पार्टी में लंबे समय से प्रचंड और ओली के खेमे के बीच गतिरोध चल रहा था। कहा जा रहा है कि नेपाल के संविधान में संसद को बिना कारण के भंग करने का प्रावधान नहीं है। इसी मुद्दे पर संविधान पीठ सुनवाई करेगी।



स्टोरी शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Pin It on Pinterest

Advertisements
%d bloggers like this: