रूस-चीन ने भेजे 19 लड़ाकू विमान, दहशत में आए दक्षिण कोरिया ने दौड़ाए F-16 फाइटर जेट

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सोल
रूस और चीन के रणनीतिक बॉम्‍बर और फाइटर जेट ने मंगलवार को ईस्‍ट चाइन सी और जापान सागर के ऊपर एक साथ उड़ान भरी। दक्षिण कोरिया ने दावा किया कि रूसी और चीनी लड़ाकू विमानों ने उसके हवाई इलाके में घुसपैठ की। दक्षिण कोरिया ने इन रूसी-चीनी विमानों को मार भगाने के लिए तत्‍काल अपने F-16 फाइटर जेट भेजे। बताया जा रहा है कि रूस के 15 और चीन के 4 लड़ाकू विमानों ने दक्षिण कोरिया की सीमा के करीब से उड़ान भरी जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनापूर्ण माहौल हो गया है।

दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा है कि चीन और रूस के फाइटर जेट ने देश के हवाई रक्षा पहचान जोन में घुसपैठ की। माना जा रहा है कि रूस और चीन की वायुसेना ने एक साथ मिलकर अभ्‍यास किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने ऐलान किया कि यह पूर्व निर्धारिक अभ्‍यास था जिसे एशिया पैसफिक इलाके में दूसरे संयुक्‍त हवाई निगरानी दस्‍ते ने चीनी वायुसेना के साथ मिलकर अंजाम दिया। इस अभ्‍यास में रूस और चीन के बेहद घातक बॉम्‍बर ने हिस्‍सा लिया।

रूस और चीन के 19 विमानों में Tu-95MS, पीएलए की वायुसेना के H-6K बॉम्‍बर और सुखोई-35 फाइटर जेट शामिल थे। इसके जवाब में दक्षिण कोरिया ने अपने अमेरिका निर्मित एफ-16 फाइटर जेट भेजे। बताया जा रहा है कि रूस के अवाक्‍स विमान भी अभ्‍यास में शामिल थे जो दक्षिण कोरिया के विमानों पर नजर रखे हुए थे। दक्षिण कोरिया ने कहा कि उसके विमानों ने रूसी और चीनी विमानों को भगाने के लिए चेतावनी दी और आग के गोले छोड़े।

किसी भी देश के हवाई क्षेत्र का उल्‍लंघन नहीं किया: रूसदक्षिण कोरिया ने कहा कि वह अपेक्षा कर रहा था कि चीन की वायुसेना अभ्‍यास कर रही है क्‍योंकि उसने योजनाबद्ध सामान्‍य ट्रेनिंग की सूचना दी थी। इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने चीन और रूस से संपर्क करके उन्‍हें इस तरह की घटना दोबारा नहीं करने की नसीहत दी है। उधर, रूस ने कहा है कि उसके विमानों ने अंतरराष्‍ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए उड़ान भरी। इस दौरान किसी भी देश के हवाई क्षेत्र का उल्‍लंघन नहीं किया गया।

यह ताजा घटना ऐसे समय पर हुई है जब 18 महीने पहले इसी तरह के संयुक्‍त गश्‍त पर दक्षिण कोरिया के फाइटर जेट ने रूस और चीन के फाइटर जेट पर फायरिंग किया था। इस दौरान जापानी एयरफोर्स के विमानों ने भी दक्षिण कोरिया का साथ दिया था और आरोप लगाया था कि रूस तथा चीन ने उसके हवाई इलाके का उल्‍लंघन किया था। इस घटना के बाद रूस और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध रसातल में चले गए थे।



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