Power Crisis in Pakistan: अंधेरे में डूबे पाकिस्तान का भविष्य अधर में, पाकिस्तानी संसद को भी बंद करने के आदेश

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पाकिस्तान का भविष्य अधर में और देश अंधेरे में डूबा हुआ है। पाकिस्तान में अब तक आटा खत्म होने की खबरें सुर्खियां बटोर रही थीं लेकिन अब पाकिस्तान में बिजली भी नहीं है। आवश्यक सेवाओं के लिए बिजली सुचारू रखने के लिए जो डीजल इस्तेमाल किया जाता है वह भी खत्म होने की कगार पर है। यदि पावर बैकअप सेवाओं को दुरुस्त नहीं किया गया तो पाकिस्तान में मोबाइल टावर पूरी तरह बंद हो जायेंगे और अस्पताल तथा परिवहन सेवाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। इस बीच, यह भी खबर सामने आई है कि बिजली की कमी के चलते पाकिस्तान के संसद भवन को भी तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया है। हालांकि इसके पीछे पाकिस्तान ने तर्क दिया है कि संसद भवन में एक शॉर्ट सर्किट हो गया था जिसके चलते इसे एहतियातन बंद करना पड़ा है लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि बिजली ही नहीं है तो संसद चलेगी कैसे? पाकिस्तान की सीनेट ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि तीन दिनों के लिए कार्यालय बंद कर दिए गए हैं। हम आपको यह भी याद दिला दें कि हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिये थे कि बाजारों आदि को शाम में ही बंद कर दिया जायेगा और निकाह आदि रात को नहीं होंगे ताकि बिजली बचाई जा सके।
उधर, पाकिस्तान में राष्ट्रीय ग्रिड में खराबी के कारण सोमवार को बड़े पैमाने पर बत्ती गुल रही जिससे राजधानी इस्लामाबाद और वित्तीय हब कराची समेत मुल्क के बड़े हिस्से में लाखों लोग बिना बिजली के रहे। बताया जा रहा है कि खराबी इसलिए आई क्योंकि प्राधिकारियों ने ईंधन की लागत बचाने के लिए रात में बिजली उत्पादन प्रणाली बंद कर दी थी। सुबह जब प्रणाली चालू की गई तो ‘‘दादू और जमशोरो के बीच कहीं फ्रीक्वेंसी तथा वोल्टेज में उतार-चढ़ाव देखा गया’’ जिससे बिजली उत्पादन प्रणाली बंद हो गई। इसके चलते पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची में लोग जब सुबह उठे तो घर में बत्ती गुल थी। पाकिस्तान के अन्य शहरों में भी बिजली बड़े पैमाने पर गुल रही लेकिन कराची पर इसका सबसे ज्यादा असर हुआ। करीब 23 लाख से अधिक आबादी वाले कराची शहर में कुछ लोगों को पीने का पानी नहीं मिला क्योंकि पानी के पंप बिजली से चलते हैं। देखा जाये तो पाकिस्तान कम होते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच हाल के वर्षों में दुनिया के सबसे खराब वित्तीय संकट वाले देशों में से एक बन गया है।
इस बीच, यह भी खबर है कि जहाजरानी एजेंटों ने नकदी की तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि विदेशी जहाजरानी कंपनियां उसके लिए अपनी सेवाएं बंद करने पर विचार कर रही हैं। ऐसी स्थिति अगर आई तो पाकिस्तान में सभी निर्यात ठप हो सकते हैं। दरअसल जहाजरानी कंपनियों का कहना है कि बैंकों ने डॉलर की कमी के चलते उन्हें माल ढुलाई शुल्क देना बंद कर दिया है। इस मुद्दे पर पाकिस्तान शिप एजेंट एसोसिएशन के चेयरमैन अब्दुल रऊफ ने वित्त मंत्री इशाक डार को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि जहाजरानी सेवाओं में कोई भी व्यवधान देश के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। एसोसिएशन ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘यदि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बंद कर दिया जाएगा, तो आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।’
दूसरी ओर, एक ओर पाकिस्तान में भुखमरी की नौबत है तो दूसरी ओर रईसों के ठाठ हैं। चूक की कगार पर खड़े पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट के बीच बीते छह महीनों के दौरान 1.2 अरब डॉलर (259 अरब रुपये) महंगी कारों, अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके कलपुर्जों जैसी वस्तुओं के आयात पर खर्च किए हैं। आर्थिक संकट के बावजूद मौजूदा सरकार ने महंगी कारों के आयात से प्रतिबंध हटा लिया है और यह डॉलर में खर्च का प्रमुख कारण बन गया है।
दुनिया भर में कटोरा लेकर फिर रहे पाकिस्तान को विश्व बैंक से तत्काल मदद की उम्मीद थी लेकिन अब खबर है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को विश्व बैंक से 1.1 अरब डॉलर के दो कर्ज की मंजूरी अगले वित्त वर्ष तक के लिए टल गई है। वाशिंगटन मुख्यालय वाली संस्था विश्व बैंक ने आयात पर बाढ़ शुल्क लगाने का भी विरोध किया है। इसके चलते पहले से ही 32 अरब डॉलर की वार्षिक योजना में एक नया रोड़ा खड़ा हो गया है। उधर, अमेरिका के डॉलरों पर वर्षों तक पलते रहे पाकिस्तान को अब वाशिंगटन से भी मदद मिलना लगभग बंद हो चुका है। बिजली संकट ने पाकिस्तान को घेरा तो इस्लामाबाद को उम्मीद हुई कि वाशिंगटन की ओर से मदद मिलेगी लेकिन अमेरिका ने कह दिया है कि वह पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड में आई खराबी को दूर करने में मदद करने को तैयार है। अमेरिका का यह बयान पाकिस्तान के लिए बिजली के बंद स्विच से भी झटका लगने के बराबर है।
-गौतम मोरारका



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