कार्यस्थल पर खाना-पीना क्यों है बेहद महत्वपूर्ण

स्टोरी शेयर करें


जब इंग्लैंड की खाद्य मानक एजेंसी की प्रमुख सुसान जैब ने हाल में कार्यस्थल पर काम के दौरान केक खाने की तुलना अप्रत्यक्ष धूम्रपान से की, तो पूरे देश में विभिन्न कार्यालयों में खलबली मच गयी।
जैब ने अंग्रेजी के दैनिक समाचारपत्र द टाइम्स से कहा, ‘‘यदि कार्यालय में कोई केक नहीं लाता, तो मैं दिन में केक नहीं खाती, लेकिन यदि लोग केक लाते हैं, मैं उसे खाती हूं।’’
अस्वस्थ उत्पादों जैसे केक और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की अधिक खपत निश्चित रूप से मोटापा और जानलेवा माने जाने वाले हृदय संबंधी रोगों के खतरों को बढ़ावा देने में योगदान कर सकती हैं।

लेकिन, यह कार्यस्थल में भोजन लाने के सामाजिक प्रभाव और सकारात्मक प्रभावों के विरुद्ध संतुलित होना चाहिए।
जब कार्यस्थल पर सहकर्मी केक या बिस्कुट एक-दूसरे से साझा करते हैं, तो निस्संदेह रूप से इससे खाद्य सामग्री देने वाले और लेने वाले दोनों को बढ़ावा मिलता है।
स्वीडन में कर्मचारियों का मानना है कि यह सच है: फीका एक दैनिक सामाजिक कार्यक्रम है जो काम पर भोजन साझा करने पर आधारित है- इसमें लोग मुख्य रूप से एक-दूसरे से केक और अन्य मीठे व्यंजन साझा करते हैं।
लेकिन, फीका में अपने काम से समय निकाल कर सहयोगियों के साथ भोजन का आनंद लेते हुए उनसे बातचीत करना शामिल है।

इस तरह एक साथ भोजन करने से कार्यस्थल के बारे में अधिक सकारात्मक भावनाओं और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य से लेकर बेहतर टीम योजना तक के लाभों को दिखाया गया है।
उन्हें केक खाने दीजिए-
वास्तव में, सुसान जैब की टिप्पणियों के मद्देनजर अधिकांश चर्चाओं ने केक या बिस्कुट खाने से लोगों की अक्षमता पर ध्यान केंद्रित किया है जिन्हें छोड़ दिया गया है।
कर्मचारियों को भोजन संबंधी अन्य दबावों का भी सामना करना पड़ता है जो कि सरकारों और कंपनियों के लिए अधिक प्राथमिकता होनी चाहिए।

कुछ शोध से पता चलता है कि कर्मचारियों को अक्सर स्वस्थ भोजन की व्यवस्था करने के लिए समय निकालना पड़ता है।
इसे रोकने का एक तरीका यह सुनिश्चित करना है कि कार्यस्थल पर या ऑफ-साइट प्रावधान के माध्यम से कर्मचारियों के लिए काम के दौरान खाने-पीने के विकल्प हों।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन में ‘‘श्रमिकों की कैंटीन’’ का इतिहास रहा है, जब 250 से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले व्यवसायों के लिए यह अनिवार्य था कि हर किसी के खाने के लिए कोई निर्धारित जगह हो।
वर्ष 1950 के दशक में, कार्यस्थल में कैंटीन कम लोकप्रिय होने लगीं, अक्सर बदलते स्वाद, पिछले ‘‘संस्थागत खानपान’’ के नकारात्मक अनुभवों, पसंद की कमी, साथ ही सरकारी सब्सिडी के नुकसान के कारण ऐसा हुआ।
टिकट रेस्तरां अब ब्रिटेन में मौजूद नहीं हैं, जहां उनका प्रचलन शुरू हुआ था, लेकिन ऐसी योजनाएं अभी भी दुनिया भर के 50 देशों में चल रही हैं।



स्टोरी शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Pin It on Pinterest

Advertisements
%d bloggers like this: