उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट से चिढ़ा अमेरिका, 5 साल बाद तैनात की परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी

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वॉशिंगटन
उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट को लेकर अमेरिका बौखलाया हुआ है। किम जोंग उन के नेतृत्व में उत्तर कोरियाई सेना ने गुरुवार और शुक्रवार को लगातार दो दिन तीन मिसाइलों का टेस्ट किया। उत्तर कोरियाई मीडिया में इसे हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण बताया जा रहा है। वहीं, इस टेस्ट से गुस्साए अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से उत्तर कोरियाई अधिकारियों और संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने तो प्रशांत महासागर में स्थित गुआम नेवल बेस पर 5 साल बाद परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी को भी तैनात कर दिया है।

गुआम पहुंची परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी
अमेरिकी नौसेना की बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बी यूएसएस नेवादा (एसएसबीएन 733) शनिवार को गुआम पहुंची है। यह ओहियो क्लास की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है। गुआम कोरियाई प्रायद्वीप के सबसे नजदीक स्थित अमेरिकी नेवल बेस है। इसके अलावा जापान में भी अमेरिकी नौसेना का सातवां बेड़ा मौजूद है। अमेरिका ने 2016 के बाद से पहली बार गुआम में परमाणु हथियारों से लैस किसी पनडुब्बी को तैनात किया है। अमेरिकी नौसेना ने कहा है कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हमारी प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है।

उत्तर कोरिया ने तीन बैलिस्टिक मिसाइलों का किया टेस्ट
उत्तर कोरिया ने पिछले दो दिनों में तीन मिसाइलों का परीक्षण किया है। इसमें शुक्रवार को एक रेल प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जाने वाली मिसाइल का टेस्ट भी शामिल है। इस टेस्ट को अमेरिकी प्रतिबंधों की जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है। दक्षिण कोरियाई सेना प्रमुख ने कहा कि दो छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (एसआरबीएम) ने उत्तर कोरिया के उत्तर-पश्चिमी तट पर पूर्व की ओर लॉन्च होने के बाद लगभग 430 किमी की दूरी को तय किया। इस दौरान मिसाइलों की अधिकतम ऊंताई 36 किलोमीटर तक मापी गई।

ट्राइडेंट परमाणु मिसाइलों से बरपा सकता है कहर
अमेरिकी नौसेना की प्रत्येक ओहियो क्लास की पनडुब्बी में 20 की संख्या में ट्राइडेंट D5 सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात होती हैं। प्रत्येक ट्राइडेंट डी5 मिसाइल 14 की संख्या में स्वतंत्र W76-1 या W88 परमाणु हथियार ले जा सकता है। इनमें से एक W76-1 परमाणु हथियार लगभग 100 किलोटन, जबकि W88 परमाणु हथियार 475 किलोटन की ऊर्जा पैदा कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि 20 ट्राइडेंट D5 सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें 280 ठिकानों पर परमाणु हमला कर सकती हैं।

कम क्षमता की परमाणु मिसाइलों को एक्टिव रखता है अमेरिका
अमेरिका और रूस के बीच कई हथियार नियंत्रण समझौतों के कारण इन मिसाइलों में से केवल 5 या 6 ही हमेशा तैनात होती हैं। जनवरी 2020 से कुछ ओहियो क्लास की पनडुब्बियों में तैनात ट्राइडेंट D5s मिसाइलों में कम क्षमता की W76-2 परमाणु विस्फोटक ही लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि ट्राइडेंट D5s मिसाइल केवल पांच किलोटन के परमाणु विस्फोट को कर सकती है। अमेरिका के कई रक्षा विशेषज्ञ इसके लिए सरकार की आलोचना करते हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जो इसे रूस के साथ परमाणु बातचीत करने के लिए आवश्यक कदम बताते हैं।

154 टॉमहॉक से लैस होती है ओहियो क्लास की पनडुब्बी
अमेरिकी नौसेना की ओहियो क्लास की पनडुब्बियां लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों से लैस होती हैं। आकार में बड़ी होने के कारण ओहियो क्लास की पनडुब्बियों में 154 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात होती हैं। यह क्षमता अमेरिका के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर में तैनात मिसाइलों की दोगुनी है। हर एक टॉमहॉक मिसाइल अपने साथ 1000 किलोग्राम तक के हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड को लेकर जाने में सक्षम है। अमेरिकी सेना में 1983 से तैनात यह मिसाइल सीरिया, लीबिया, ईराक और अफगानिस्तान में अपनी ताकत दिखा चुकी है।


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