अफगानिस्तान में बच्चे और किडनी बेच रहे मजबूर लोग, कहां गया तालिबान का इस्लामिक अमीरात?

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काबुल
अफगानिस्तान में के कब्जे के बाद स्थिति लगातार बिगड़ रही है। काबुल में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग दो वक्त की रोटी खरीदने के लिए कुछ भी बेचने को तैयार हैं। हाल में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अफगानिस्तान में खुद को जिंदा रखने के लिए लोग अपने बच्चों और किडनी तक बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में पहले अफीम जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए बदनाम अब इंसानों और मानव अंगों की मंडी बनता जा रहा है।

बच्चों और किडनी को बेच रहे लोग
द मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने अपने अंगों को बेचा है। इससे पहले गरीबी और भुखमरी से जूझ रहे कई मां-बाप ने मजबूरी में अपने बच्चों तक को बेच दिया था। यूरोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ नासिर अहमद ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले 12 महीनों में 85 किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन किया है।

4.25 हजार में बेची जा रही एक किडनी
अफगानिस्तान में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और खरीदार 600000 अफगानी में समझौता कर सकते हैं। भारतीय रुपये में यह राशि करीब 4 लाख 25 हजार रुपये बैठती है। इसमें किडनी की कीमत ब्लड ग्रुप के आधार पर तय होती है। औसतन एक किडनी की कीमत डेढ़ लाख रुपये होती है। इसके अलावा अस्पताल का खर्च, दवाइयां और ऑपरेशन की फीस अलग से लगती है।

जान का जोखिम उठाकर किडनी बेच रहे अफगान
सर्जन डॉ नासिर अहमद के साथी और इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ अहमद शाकिब ने बताया कि जो लोग अपने अंगों को बेच रहे हैं, उन्हें खुद की जान जाने का भी खतरा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग जो आर्थिक समस्याओं के कारण अपनी किडनी बेचते हैं, उन्हें लंबे समय में किडनी की कमी के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। अफगानिस्तान में किडनी दान की संस्कृति सामान्य नहीं है। अधिकांश किडनी डोनर आर्थिक समस्याओं से पीड़ित हैं।

काम के बदले गेहूं दे रहा तालिबान
इस संकट को कम करने के लिए तालिबान ने एक हफ्ते पहले ही काम के बदले भोजन कार्यक्रम को जोर-शोर से लागू किया है। ऐसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को वेतन के तौर पर दूसरे देशों से दान में आए गेहूं को दिया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान की मदद के लिए 3.2 बिलियन पाउंड की मदद की अपील की है।

बेरोजगारी और गरीबी ने बिगाड़े हालात
टोलो न्यूज के अनुसार, गरीबी और बेरोजगारी के कारण काबुल की सड़कों पर सामान बेचने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है। काबुल में अधिकतर लोगों के पास खाना खरीदने के लिए भी पैसा नहीं बचा है। विक्रेताओं ने कहा कि उन्हें अपने परिवारों के लिए रोटी का एक टुकड़ा खोजने के लिए कुछ करना होगा। चूंकि कोई नौकरी नहीं है, इसलिए उन्हें सड़कों पर सामान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

पूरे अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब
पझवोक न्यूज वेबसाइट के अनुसार, पूरे अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब हैं। लोगों को अस्पतालों में इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, दुकानों में आम बीमारियों की दवाईयां तक नहीं मिल रही हैं। बाहरी देशों से आयात ठप होने के कारण खाने-पीने की चीजों की भी कमी हो गई है। दूर-दराज के इलाके में तो लोग वस्तु विनिमय जैसे पुराने तरीकों को अपना रहे हैं।



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