क्‍यूबा संकट को दोहराना चाहते हैं पुतिन ? अमेरिका की नाक के नीचे सेना तैनात करने की धमकी

स्टोरी शेयर करें



मास्‍को
यूक्रेन को लेकर अमेरिका समेत नाटो देशों और रूस के बीच जारी तनाव में अब नया मोड़ आता दिख रहा है। रूस ने संकेत दिया है कि वह लैटिन अमेरिकी देशों वेनेजुएला और क्‍यूबा में सेना तैनात करने से हिचकेगा। रूस की इस चेतावनी से शीत युद्ध के समय पैदा हुए क्‍यूबा संकट की यादें ताजा हो गई हैं। सोवियत संघ ने क्यूबा में अपनी परमाणु मिसाइल तैनात कर दी थी। क्‍यूबा में जिस जगह यह सोवियत मिसाइल तैनात थी, वह अमेरिका से सिर्फ 145 किमी दूर था। इससे तनाव काफी बढ़ गया था।

दरअसल, यूक्रेन को लेकर पश्चिम देशों के साथ रस्साकशी में रूस ने गुरुवार को अपना रुख आक्रामक कर दिया। रूस के एक वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के साथ तनाव बढ़ता है तो क्यूबा और वेनेजुएला में रूस की सैन्य तैनाती की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। जिनेवा में अमेरिका के साथ सोमवार की वार्ता में रूसी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करने वाले उप विदेश मंत्री सर्जेई रियाबकोव की टिप्पणी टीवी पर प्रसारित हुई। इसमें उन्होंने कहा कि क्यूबा और वेनेजुएला में रूस द्वारा सैन्य संसाधन भेजने की संभावना की वह न तो पुष्टि कर सकते हैं और न ही इसे खारिज कर सकते हैं।

रूस भी सैन्य एवं तकनीकी कदम उठा सकता है: पुतिन
जिनेवा में हुई वार्ता और बुधवार को विएना में हुई नाटो-रूस की बैठक में यूक्रेन के नजदीक रूस की सैन्य तैनाती के बीच उसकी सुरक्षा मांगों को लेकर बनी खाई को पाटने में सफलता नहीं मिली। मास्को ने जहां नाटो के विस्तार को रोकने की मांग की है, वहीं वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों ने इन मांगों को खारिज कर दिया है। रूस के आरटीवीआई टीवी के साथ साक्षात्कार में रियाबकोव ने कहा, ‘यह सब हमारे अमेरिकी समकक्षों की गतिविधियों पर निर्भर करता है।’ उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका रूस को उकसाने वाले कार्रवाई करता है और उस पर सैन्य दबाव बनाता है तो रूस भी सैन्य एवं तकनीकी कदम उठा सकता है।

रियाबकोव ने कहा कि अमेरिका और नाटो ने यूक्रेन तथा अन्य पूर्व-सोवियत राष्ट्रों तक गठबंधन बल के विस्तार को रोकने की गारंटी देने की रूस की प्रमुख मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया है जिससे वार्ता जारी रहने पर संशय की स्थिति बन गयी हे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने वार्ता में कुछ सकारात्मक तत्व और अंतराल थोड़ा कम होने की बात कही, लेकिन रूस की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट असहमति के चलते बातचीत को असफल करार दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘उठाये गये कुछ प्रमुख मुद्दों पर स्पष्ट उत्तर पाने के लिए वार्ता शुरू की गयी थी और इन प्रमुख विषयों पर असहमति बनी रही जो खराब बात है।’

यूक्रेन की पूर्वी सीमा के पास रूस के एक लाख से अधिक सैनिक
पेसकोव ने चेतावनी दी कि अगर रूस के राष्ट्रपति पुतिन और अन्य शीर्ष सैन्य तथा असैन्य नेताओं को निशाना बनाने वाले प्रस्तावित प्रतिबंधों को स्वीकार किया जाता है तो अमेरिका-रूस संबंध पूरी तरह खराब हो सकते हैं। सीनेट के डेमोक्रेट सांसदों द्वारा प्रस्तावित कदम में मास्को द्वारा यूक्रेन में सैनिक भेजने की स्थति में रूस के शीर्ष वित्तीय संस्थानों की निंदा का भी प्रस्ताव है। पेसकोव ने प्रस्ताव की निंदा करते हुए इसे वार्ता के दौरान रूस पर दबाव बनाने की कोशिश बताया और कहा कि यह कारगर नहीं होगा। बातचीत ऐसे समय में हुई जब यूक्रेन की पूर्वी सीमा के पास रूस के एक लाख से अधिक सैनिक, टैंक और भारी सैन्य उपकरण तैनात किये गये हैं।

रूस ने हमले की योजना की धारणाओं को खारिज कर दिया और उलटा पश्चिम जगत पर मध्य और पूर्वी यूरोप में सैन्य कर्मियों और संसाधनों को तैनात करके उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया है। पेसकोव ने कहा कि रूस वार्ता जारी रखने के लिए तैयार है लेकिन चाहता है कि उनका परिणाम निकले। उन्होंने कहा, ‘वार्ता जारी रखने की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं आएगी।’



स्टोरी शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Pin It on Pinterest

Advertisements
%d bloggers like this: