चीन का दलाल है मालदीव का पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ? चला रहा ‘इंडिया आउट’ कैंपेन

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माले
मालदीव को चीन के कर्ज के जाल में ढकेलने वाला पूर्व प्रधानमंत्री अब्‍दुल्‍ला यामीन भारत के खिलाफ देश में जहरीला अभियान चला रहा है। जेल से छूटने के बाद यामीन के ‘इंडिया आउट’ अभियान में और ज्‍यादा तेजी आई है। इस बीच मालदीव की सरकार में विदेश मंत्री अब्‍दुल्‍ला शाहिद ने यामीन को कड़े शब्‍दों में नसीहत दी है। शाहिद ने कहा कि मालदीव को मदद देने वाले पड़ोसी देश पर हमला करना मूर्खता है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि मालदीव एक संतुलित विदेशी नीति को अपना रहा है।

शाहिद ने कहा, ‘हमारे देश को मदद देने वाले पड़ोसी देशों पर जुबानी हमला बोलना बहुत ही मूर्खतापूर्ण है। हमारे लंबे समय से दोस्‍ताना संबंध हैं और हमें इससे बचना चाहिए।’ उन्‍होंने एक स्‍थानीय न्‍यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि राष्‍ट्रपति इब्राहिम सोलिह की एक संतुलित विदेश नीति है। इंडिया आउट अभियान और चीन के समर्थन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शाहिद ने कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय मूल्‍यों और सिद्धांतों को मानने वाले सभी देशों के साथ सामंजस्‍य बनाए रखना मालदीव जैसे देश के लिए बहुत जरूरी है जिसकी एक छोटी अर्थव्‍यवस्‍था है।

‘भारत ने हर संकट में मालदीव को सहायता मुहैया कराई’
मालदीव के विदेश मंत्री ने कहा कि यह मालदीव के लिए राजनयिक हित में भी है। उन्‍होंने कहा, ‘हालांकि यह देश के हित में नहीं है कि घरेलू विवादों का फायदा उठाया जाए और अन्‍य देशों को निशाना बनाया जाए।’ शाहिद ने जोर देकर कहा कि भारत के साथ नजदीकी संबंध हैं और माले में किसी की भी सरकार रही हो, नई दिल्‍ली से हमें सहायता मिलती रही है। उन्‍होंने कहा, ‘राष्‍ट्रपति मौमून के कार्यकाल में मालदीव पर आतंकी हमला हुआ और सुनामी आई। राष्‍ट्रपति यामीन के कार्यकाल में माले में पानी का संकट आया और अब राष्‍ट्रपति सोलिह के कार्यकाल में कोरोना महामारी आई है। इस बार भी सहायता मिली है।’ शाहिद ने कहा क‍ि भारत ने हर संकट में मालदीव को सहायता मुहैया कराई है।

भारत का अहम पड़ोसी देश मालदीव चीन के कर्ज के पहाड़ तले दबता जा रहा है। मालदीव सरकार के मुताबिक देश पर चीन का 3.1 अरब डॉलर का भारी-भरकम कर्ज है। वह भी तब जब मालदीव की पूरी अर्थव्‍यवस्‍था करीब 5 अरब डॉलर की है। मालदीव के पूर्व राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद नशीद कहते हैं कि देश पर चीन का कुल कर्ज करीब 3.1 अरब डॉलर है। इसमें सरकारों के बीच लिया गया लोन, सरकारी कंपनियों को दिया गया लोन तथा प्राइवेट कंपनियों को दिया गया लोन शामिल है जिसे गारंटी मालदीव सरकार ने दी है। नशीद को यह डर सता रहा है कि मालदीव चीन के कर्ज के जाल में फंस सकता है।

भारत ने 40 करोड़ डालर कर्ज और 10 करोड़ डालर अनुदान द‍िया
भारत ने पिछले दिनों मालदीव से चीन को बाहर निकालने के लिए रणनीतिक रूप से अहम फैसला लिया था। इसके तहत भारत मालदीव में महत्वपूर्ण सम्पर्क परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 40 करोड़ डालर की कर्ज सुविधा और 10 करोड़ डालर का अनुदान दे रहा है। 6.7 किलोमीटर की ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना (जीएमसीपी) मालदीव में सबसे बड़ी नागरिक आधारभूत परियोजना होगी जो माले को तीन पड़ोसी द्वीपों- विलिंगिली, गुल्हीफाहू और थिलाफूसी से जोड़ेगी। जीएमसीपी की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि यह सत्तारूढ़ एमडीपी पार्टी का प्रमुख चुनावी वादा था जिसके लिये मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पिछले वर्ष सितंबर में जयशंकर से बैठक के दौरान भारत की सहायता मांगी थी। भारत ने बड़े पैमाने पर कोरोना वैक्‍सीन मालदीव को दी है।

रणनीतिक रूप से अहम है मालदीव
अरब सागर में 90 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला मालदीव भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम देश है। मालदीव की जलसीमा से सबसे नजदीक स्थित भारतीय द्वीप मिनीकॉय की दूरी मात्र 100 किलोमीटर है। जो कि लक्षद्वीप की राजधानी कावरत्ती से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। बता दें कि केरल के दक्षिणी बिंदू से मालदीव के इस द्वीप की दूरी मात्र 600 किलोमीटर ही है।



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