अरुणाचल पर चीन ने दिखाई आंख, विशेषज्ञ बोले- भारत से उलझना है ‘ड्रैगन’ की सबसे बड़ी भूल

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पेइचिंग
विस्तारवादी चीन अवैध तरीके से पड़ोसी देशों की जमीन हड़पने में विश्वास रखता है। उसके यह मंसूबे भारतीय सेना के आगे फीके पड़ जाते हैं इसलिए वह सीमावर्ती इलाकों में गांव और सैन्य शहर जैसे प्रोजेक्ट्स का निर्माण करता रहता है। अब चीन भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश पर नजरे गड़ाए बैठा है। पूर्वी लद्दाख में पहले ही दोनों देशों की सेनाएं अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। 13वें दौर की बातचीत के बाद भी चीन पीछे हटने से इनकार कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं भारत से सीमा विवादों में उलझना चीन की सबसे बड़ी भूल है। आइए जानते हैं कैसे…

ताजा विवाद उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के अरुणाचल प्रदेश के दौरे को लेकर शुरू हुआ। अरुणाचल प्रदेश को चीन दक्षिणी तिब्बत कहता है जबकि यह भारत का हिस्सा है। चीन में अरुणाचल प्रदेश को Zangnan कहा जाता है। वेंकैया नायडू के अरुणाचल दौरे पर चीन ने आपत्ति जताई। चीनी विदेश मंत्री झाओ लिजियान के हवाले से चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने कहा, ‘चीन भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता है और भारत के उपराष्ट्रपति की हालिया यात्रा का कड़ा विरोध करता है।’

भारत से उलझना सबसे बड़ी भूलग्लोबल टाइम्स के इस ट्वीट पर विशेषज्ञों ने भी अपनी राय दी। ‘SUPERPOWER INTERRUPTED: THE CHINESE HISTORY OF THE WORLD’ किताब के लेखक माइकल शुमान ने कहा कि बीजिंग का भारत के साथ अपने संबंधों को खराब करना उसकी विदेश नीति की सबसे बड़ी विफलता साबित हो सकती है। विदेशी मामलों के जानकार जेम्स क्रैबट्री ने माइकल के साथ सहमति जताते हुए कहा, ‘मैं इससे सहमत हूं। यह गैर-जरूरी था और संबंध पहले जैसे हो सकते थे, कम से कम मोदी के पहले कार्यकाल में।’

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हाल के सालों में कई गलत रणनीतिक अनुमान लगाए हैं लेकिन यह देखना मुश्किल है कि चीन क्या हासिल करना चाहता है। किसी भी पड़ोसी देश से चीन के संबंध मुधर नहीं है। एक ओर भारत जैसा मजबूत और ताकतवर देश है तो दूसरी ओर ताइवान भी झुकने या पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन ताइवान की ओर अपने फाइटर जेट भेजता है तो ताइवान भी युद्ध के लिए तैयार नजर आता है।

भारत ने दिया कड़ा जवाबचीन की किसी भी हरकत का भारत तुरंत जवाब देता है। उपराष्ट्रपति के दौरे पर आपत्ति जताने के बाद भारत ने चीन को कड़ा जवाब दिया था। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारतीय नेताओं के भारत के किसी राज्य की यात्रा पर आपत्ति करने का कोई कारण नहीं है। भारत के रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने एक ट्वीट कर कहा कि भारत की ओर से शी जिनपिंग की तिब्बत की उकसावे वाली यात्रा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

जिनपिंग का भारत की सीमा से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पीएलए बेस पर रात भर रुकना और युद्ध की तैयारियों जैसा आह्वान शामिल था। भारत की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई हो सकता है और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि चीन उपराष्ट्रपति की अरुणाचल यात्रा का विरोध करने के लिए इससे प्रेरित हुआ हो।

अरुणाचल भारत का अटूट हिस्साअरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव बनने के बाद पहली बार इसी साल जुलाई महीने में तिब्बत का दौरा किया। इस दौरान जिनपिंग ने राजधानी ल्हासा में डेपुंग मठ, बरखोर स्ट्रीट और पोटाला पैलेस जैसे प्रसिद्ध बौद्ध मठों का दौरा भी किया। चीन तिब्बत के तीन नए इलाकों में एयरपोर्ट भी बनाने जा रहा है उनके नाम लुंज़े काउंटी, टिंगरी काउंटी और बुरांग काउंटी।

चीन इन क्षेत्रों में बनने वाले एयरपोर्ट को 2025 के अंत तक शुरू करने जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारतीय नेताओं के भारत के किसी राज्य की यात्रा पर आपत्ति करने का कोई कारण नहीं है। बागची ने कहा हमने चीन के आधिकारिक प्रवक्ता की टिप्पणी को आज देखा है। हम ऐसे बयानों को खारिज करते हैं ।



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