ISI चीफ को लेकर पाकिस्तान सेना के आगे जिद पर अड़े इमरान खान, सता रहा तालिबान का डर?

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इस्लामाबादपाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के नए प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल बाजवा के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। आईएसआई के पूर्व चीफ ले. जनरल फैज हमीद को पेशावर कोर का कमांडर बना दिया गया है और अब खुफिया एजेंसी की कमान ले. जनरल नदीम अंजुम को सौंप दी गई है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान ने मंगलवार को अपने कैबिनेट से इस बारे में चर्चा की।

खान ने कहा कि उन्होंने सेना प्रमुख जनरल बाजवा से हमीद को आईएसआई प्रमुख के पद पर कुछ और समय तक बनाए रखने के लिए कहा था क्योंकि पड़ोसी देश अफगानिस्तान में स्थिति अभी गंभीर है। कैबिनेट की बैठक के बाद सत्तारूढ़ पीटीआई के प्रमुख आमिर डोगर ने कहा कि इमरान खान और बाजवा ने इस मामले पर सोमवार देर रात विस्तृत बैठक की। उनसे पूछा गया कि डीजी आईएसआई को नियुक्त करने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया क्या थी।

प्रधानमंत्री के पास हैं अधिकारडोगर ने कहा कि प्रधानमंत्री को तीन नाम भेजे जाते हैं जिसमें से वह एक को चुनते हैं जिसे वह उपयुक्त समझते हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट में कैबिनेट बैठक की जानकारी दी गई। डोगर ने कहा कि पीएम और सैन्य नेतृत्व दोनों में घनिष्ठ समन्वय था और सभी कानूनों का पालन करके डीजी आईएसआई की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि खान और बाजवा इस पर सहमत हैं और प्रधानमंत्री के पास इस के अधिकार हैं।

विवादों से भरा हामिद कार्यकालमंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने भी खान-बाजवा की बैठक की पुष्टि की। जानकारों ने ईटी को बताया कि हमीद को इमरान खान का समर्थन हासिल है, जिनका कार्यकाल काफी विवादास्पद रहा है। तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद हामिद की अचानक काबुल यात्रा ने सभी को चौंका दिया था। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में कोई भी पीएम सेना के खिलाफ नहीं जा सकता है।

अफगानिस्तान में दोनों की भूमिका बेहद अहमलेफ्टिनेंट जनरल फैज अब पेशावर कोर के कमांडर हैं। इसे प्रमोशन कहा जा सकता है क्योंकि इस पद को पाकिस्तान सेना में काफी अहम माना जाता है। हालांकि अभी भी वह अफगानिस्तान मुद्दे पर एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं नए आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम को युद्ध के नजरिए से एक कठोर सैनिक माना जाता है। वर्तमान में अफगानिस्तान में उनकी भूमिका भी बेहद अहम साबित हो सकती है।



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