जिम्मेदारों की अनदेखी, आश्रितों के भरोसे मरीजों को खून, 300 यूनिट की जगह मात्र 10 यूनिट भंडारण

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अनूपपुर। जिला अस्पताल में एनेमिक मरीजों के साथ सडक़ हादसों के शिकार मरीजों को भर्ती कराने के साथ परिजनों को खून की व्यवस्था में हमेशा तैयार रहना होगा। क्योंकि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में उपयोगी अधिकांश ग्रूप के खून की कमी है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल के ३०० यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक में मात्र १० यूनिट खून उपलब्ध है। लेकिन जिस ग्रूप के ग्रूप की उपलब्धता बनी है, उनका उपयोगिता मांग कम है। जिसके कारण अन्य समूह की रक्त की उपलब्धता के लिए मरीजों को इलाज के लिए लम्बे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। रक्त की कमी को पूरा करने अस्पताल मरीजों के परिजनों से खून के बदले खून जैसी व्यवस्था में रक्त की उपलब्धता करा रहा है। इनमें अधिकांश परिवारों के परिजन खून देने लायक नहीं होते या किसी संशय में खून देने से इंकार कर जाते हैं। जबकि विकासखंड स्तर की दो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुष्पराजगढ़ और कोतमा की २५ यूनिट क्षमता वाली ब्लड यूनिट सालभर से एक यूनिट रक्त भी भंडारित नहीं कर पाई है। जिसके कारण सडक़ हादसे से लेकर सिजेरियन प्रसव के लिए अस्पताल आने वाली प्रसूताओं को अनूपपुर के बजाय शहडोल की ओर रेफर किया जा रहा है। इसमें मरीजों के साथ साथ परिजनों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात तो यह है कि सिकलसेल और प्रसव जैसी गम्भीर मरीजों के लिए खून के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। इसमें डोनर से परिजन किसी प्रकार खून की सुविधा बनाकर अपने मरीजों की जान बचा रहे हैं। लेकिन इस अव्यवस्था में मरीजों की जान संशय में बनी हुई है।
बॉक्स: चार माह में एक मात्र शिविर, मात्र ३२ यूनिट रक्त हुए थे उपलब्ध
बताया जाता है कि जिला अस्पताल में रक्त की कमी के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही के कारण बनी है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान कहीं कोई शिविर नही लगाए गए, वहीं मोजरबेयर पावर प्लांट के उपरांत पिछले चार माह के दौरान राजेन्द्रग्राम स्वास्थ्य केन्द्र में एक मात्र शिविर का आयोजन हो सका था। जिसमें मात्र ३२ यूनिट खून की उपलब्धता हो सकी थी। जबकि जिला अस्पताल में दुर्घटनाओं और रोजाना सीजर प्रसव ऑपरेशन सहित अन्य जरूरतमंदों की पूर्ति में ३० यूनिट से अधिक ब्लड की रोजाना आवश्यकता होती है। वर्तमान उपलब्ध ब्लड ग्रूपों में ए निगेटिव की १, बी पॉजिटिव ०, ओ निगेटिव ० तथा एबी पॉजिटिव की ०, ए पॉजिटिव ०, बी निगेटिव १, ओ पोजिटिव ८, एबी निगेटिव का अभाव बना हुआ है।
बॉक्स: ३०० की क्षमता २५ यूनिट अनिवार्य
जानकारी के अनुसार जिला ब्लड बैंक में 300 यूनिट की क्षमता है इनमें न्यूनतम १०० यूनिट ब्लड रखना अनिवार्य है, लेकिन न्यूनतम हालात में २५ अतिअनिवार्य माना गया है। लेकिन हालात यह है कि सालभर से अधिक समय से २५ यूनिट भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। प्रतिमाह जिला अस्पताल को १५०-२०० यूनिट की आवश्यकता होती है। इनमें सर्वाधिक ग्रूप ओ पोजिटिव लगभग ६०-७५ यूनिट तथा सबसे कम एबी पॉजिटिव १०-१२ यूनिट खर्च होता है।
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