पति के गुजर जाने के बाद बेटियां बनी सहारा, किराना दुकान के सहारे पांचों पुत्रियों की परवरिश

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अनूपपुर। बिजुरी निवासी चंद्रवती शुक्ला के पति की मृत्यु के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर आ पड़ी। घर के माली हालत में पांच बेटियां की परवरिश मां के कंधों पर अब सबसे बड़ी चिंता बन आई। उनमें भी सबसे बड़ी चिंता और भय उनकी शादी-विवाह कैसे की जाएगी की बात अंदर से खाई जा रही थी। लेकिन यहां चंद्रवती शुक्ला ने हार नहीं मानी तथा तीन बेटियों की शादी के बाद दो बेटियों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी निभा डाली। वर्तमान में तीन बेटिया अपना घर बसा रही है, जबकि दो बेटियां मां की आंचल में उच्च शिक्षा पा रही है। चंद्रवती शुक्ला ने बताया कि उनके पति की मृत्यु वर्ष 2008 में हो गई थी। जिसके बाद उनकी पांच बेटियों की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। लेकिन इस कठिन समय में भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ा और बेटियों को शिक्षित करने के साथ तीन बेटियों का विवाह वह कर चुकी है।
बॉक्स: किराना दुकान बना सहारा
चंद्रवती शुक्ला ने बताया कि ऐसे मुश्किल समय में रोजगार के रूप में उनके पास छोटी सी किराने की दुकान थी। जिससे होने वाली आय से न सिर्फ उन्होंने बेटियों को पाला बल्कि उन्हें शिक्षित करते हुए उनके विवाह के लिए भी बचत करती रही। इससे अब तक तीन बेटियों का विवाह वह कर चुकी हैं, वही दो बेटियां अभी पढ़ाई कर रही हैं। इस संघर्ष में उनकी बेटियों ने भी कम उम्र में हर कार्य में साथ देते हुए उनके बोझ को कम करने का प्रयास किया।
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