प्रताड़ित SC-ST को दी गई सरकारी मदद

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सतना. जिले में अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों की प्रताड़ना थमने का नाम नहीं ले रही। हालांकि पुलिस व प्रशासन लगातार इनकी मदद को आगे आ रहा है बावजूद इसे इन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किए जाने की सूचनाएं लगातार आ रही हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबकि अप्रैल से नवंबर के बीच ऐसे 205 मामले चिह्नित किए गए हैं। अब इनकी मदद को जिला प्रशासन आगे आया है।

इसी के तहत कलेक्टर अजय कटेसरिया की अध्यक्षता में कलेक्टर सभाकक्ष में हुई जिला सतर्कता एवं मॉनीटरिंग समिति की बैठक में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के 205 प्रकरणों से जुड़े लोगों को 5 करोड़ 29 लाख रुपये की सहायता राशि का भुगतान किया गया।

बैठक में बताया गया कि 2020-21 में अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अत्याचार से पीड़ित अनुसूचित जाति के 168 प्रकरणों में 1 करोड़ 97 लाख 75 हजार रुपये तथा अनुसूचित जनजाति के 37 प्रकरणों में 45 लाख 25 हजार रुपये की राशि स्वीकृत कर उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत पीड़ितों के बैंक खातों में राशि का भुगतान किया जाता है। अत्याचार संबंधी घटनाओं में पीड़ित के नजदीकी थाने में अपराध पंजीकृत किए जाते हैं। एससी एसटी एक्ट के मामलों की विवेचना संबंधित थाना क्षेत्र के एसडीओपी द्वारा की जाती है। बैठक में बताया गया कि अत्याचार से पीड़ितों एवं उनके साक्षियों को न्यायालय द्वारा बुलाए जाने पर यात्रा भत्ता का भुगतान किया जाता है। अन्वेषण अधिकारी द्वारा बुलाने पर यात्रा भत्ता के रूप में 43 पीड़ितों एवं उनके गवाहों को 1 हजार 969 रुपये यात्रा भत्ता तथा 44 व्यक्तियों को 9 हजार 389 रुपये की मजदूरी और भरण-पोषण के लिये 43 व्यक्तियों को 4 हजार 355 रुपये का भुगतान किया गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत विशेष न्यायालय में कुल 581 प्रकरणों प्रस्तुत हुए। जिनमें 10 प्रकरण में सजा, 13 दोषमुक्त, 3 राजीनामा, 2 में रिकार्ड दाखिल और 553 प्रकरण लंबित हैं। अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज अपराधों के अन्वेषण की स्थिति में एससी एसटी वर्ग के कुल 214 प्रकरण नवंबर 2020 तक पंजीकृत हुए हैं। इनमें 191 प्रकरणों में न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया गया है, शेष 23 प्रकरण विवेचना हेतु लंबित हैं। इसी प्रकार शिकायती आवेदन पत्रों में कुल प्राप्त 26 शिकायत पत्रों में से 17 प्रकरणों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई व 7 प्रकरण नस्तीबद्ध, 1 प्रकरण में अपराध कायम किया गया तथा 1 प्रकरण लंबित है।

कलेक्टर कटेसरिया ने बताया कि अत्याचार निवारण अधिनियम अंतर्गत हत्या के मामले में आश्रित सदस्य को सहमति के आधार पर 5 हजार रुपये एवं वर्तमान महंगाई भत्ता सहित पेंशन के रूप में दिए जाने तथा स्व-रोजगार स्थापित कराने का प्रावधान है।

इस मौके पर जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण अविनाश पांडेय, जिला लोक अभियोजक एसएल कोष्टा, डीआईओ डॉ. सतेंद्र सिंह, निरीक्षक अजाक्स थाना हरीश दुबे, सांसद प्रतिनिधि संतोष कुमार चौधरी, अशासकीय सदस्य एडवोकेट पुष्पेंद्र बागरी, अजाक्स अध्यक्ष रामकलेश साकेत, अजय समुन्द्रें, प्रवीण सिंह, पीएल सूर्यवंशी सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।



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