जनरल प्रमोशन में फेल हुए छात्रों का परिणाम जानने कमेटी गठित

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रीवा। कोरोना संक्रमण की वजह से छात्रों की परीक्षा में इस बार कई बदलाव हुए हैं। स्नातक और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं ओपन बुक प्रणाली से हुई हैं। साथ ही प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया गया। इस पर छात्रों की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई। कई दिनों से चल रहे छात्रों के धरना-प्रदर्शन के बाद अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ने एक कमेटी गठित की है। जिसमें जीडीसी की प्राचार्य डॉ. नीता ङ्क्षसह, माडल साइंस कालेज के प्रो. एसएन दुबे एवं जीडीसी की प्रो. विभा श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि यह जांच कमेटी छात्रों के आरोपों पर कालेज प्रबंधन से जवाब मांगेगी और यह तथ्य जांचने का प्रयास करेगी कि छात्रों के परीक्षा परिणाम खराब हुए हैं तो उसकी प्रमुख वजह क्या है। इसके पहले एनएसयूआइ के प्रदेश सचिव अभिषेक तिवारी, मंजुल त्रिपाठी, कालेज के छात्र संघ की अध्यक्ष योगिता सिंह परिहार सहित अन्य कई छात्रों के समूहों की ओर से ज्ञापन सौंपा गया था। जिसमें कहा गया था कि ओपन बुक प्रणाली का जो परीक्षा परिणाम आया है उसमें अधिकांश छात्रों को अनुत्तीर्ण किया गया है। इसी तरह जनरल प्रमोशन प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को दिया गया है। शासन का निर्देश था कि पूर्व के प्राप्तांकों के आधार पर जनरल प्रमोशन के अंक निर्धारित किए जाएं। इसमें कई ऐसे छात्र हैं जो प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद द्वितीय वर्ष में आए थे। कालेज प्रबंधन ने जनरल प्रमोशन में उन्हें भी अनुत्तीर्ण कर दिया है। इसलिए छात्रों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि कालेज प्रबंधन ने परीक्षा परिणाम बनाने में पूरी तरह से मनमानी की है और कालेज प्राचार्य ने छात्रों की मांगों को अनसुना कर दिया है।

कई छात्रों ने खाली उत्तरपुस्तिकाएं जमा की
ओपन बुक प्रणाली में छात्रों को घर पर उत्तरपुस्तिकाएं लिखने के लिए अवसर दिया गया था। कालेज प्रबंधन का तर्क है कि कई छात्रों ने खाली उत्तरपुस्तिका जमा कर दी है, जिसकी वजह से वह अनुत्तीर्ण हो गए हैं। कालेज प्रबंधन का यह भी तर्क है कि उसकी ओर से तैयार किए गए परीक्षा परिणाम में कोई तकनीकी त्रुटियां भी नहीं हैं।
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