जिला उद्योग विभाग को नहीं सौंपी औद्योगिक विकास परियोजना की जिम्मेदारी, प्लाट का नहीं हुआ आवंटन

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अनूपपुर। अनूपपुर-कोतमा मार्ग स्थित कदमटोला गांव में पिछले पांच साल से निर्माणाधीन ९.४३ करोड़ की औद्योगिक परियोजना बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं करा सकी। प्रस्तावित लद्यु उद्योग आधारित ईकाइयां लगाने का काम प्लाट आवंटन के अभाव में अबतक आरम्भ नहीं हो सका है। यहां तक लद्यु उद्योग निगम ग्वालियर ने परियोजना को संवारने जिला उद्योग विभाग को भी जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। जिसके कारण सडक़, बिजली सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी औद्योगिक एरिया से किसी प्रकार की ईकाइयां स्थापित नहीं हो सकी है। जबकि शुरूआती समय से ही औद्योगिक परियोजना में ५ एकड़ की विवादित जमीन का टुकड़ा का भी निराकरण नहीं हो सका है। जिसके कारण अब यह औद्योगिक विकास परियोजना मात्र कागजों तक सिमटकर रह गई है। बताया जाता है कि ग्वालियर स्थित लद्यु उद्योग निगम विभाग द्वारा ही औद्योगिक विकास परियोजना से जुड़ी सारी जिम्मेदारी सम्भाली जा रही है। जिसके कारण जिले में स्थापित हो रही औद्योगिक विकास परियोजना को गति नहीं मिल पा रही है। जबकि दो साल पूर्व ही निवेशकों के लिए प्लांट आवंटन की प्रक्रिया अपनाते हुए १०७ प्लाट के लिए ईकाइयों को स्थापित किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन अब तक निवेशकों को प्लाट ही आवंटन नहीं हो सके हैं। विदित हो कि औद्योगिक विकास की मांग पर अनूपपुर में सितम्बर २०१६ में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने २ करोड़ २९ लाख ४६ हजार की लागत से औद्योगिक विकास क्षेत्र की आधारशिला कदमटोला में रखी थी। जिसका मुख्य उद्देश्य अनूपपुर जिले के युवाओं को औद्योगिक विकास में भागीदारी बनाते हुए आत्मनिर्भर बनाना था। यहां लघु उद्योग से जुड़े औद्योगिक विकास को गति प्रदान कराई जाती। इसमें ५ करोड़ की अधिकतम लागत वाली योजनाओं को शामिल किया जाता, यानि अधिकतम ५ करोड़ की प्लांट मशीनरी स्थापित करने वाले उद्योग स्थापित किए जाते।
बॉक्स: जमीनी विवाद का नहीं हुआ निराकरण
इंडस्ट्रीरियल एरिया के लिए २२ हेक्टेयर भूमि आवंटित कराई गई थी। जिसमें पांच एकड़ की विवादित जमीन सामने आई। इसके लिए पूर्व जिला प्रभारी मंत्री ने विभाग और जिला प्रशासन से जमीन की समस्या को सुलझा कर सौंपने के निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी विवाद का समाधान नहीं हो सका। जिसमें लगभग १४ प्लांट अतिक्रमण के दायरे में तथा ७ का निर्माण कार्य अधूरा है।
बॉक्स: पानी टंकी बनी समस्या, स्वयं करनी होगी व्यवस्था
औद्योगिक परियोजना में पानी की सुविधा ही गायब हो गई। जबकि पूर्व प्रस्तावित योजनाओं में दो तलीय पानी टंकी का निर्माण कराया जाना था। लेकिन ठेकेदार के पास कोई वित्तीय आवंटन नहीं कराया गया। बिना पानी की सुविधा जिला उद्योग विभाग ने आवेदकों को प्लॉट आवंटन नहीं किया। बताया जाता है कि पूर्व पीएस उद्योग विभाग भोपाल के मौखिक आदेश में पानी टंकी के प्रस्ताव पर कांग्रेस सरकार के दौरान रहे पीएस ने विभाग के भेजे पानी टंकी निर्माण प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। माना जाता है कि दो तलीय पानी टंकी निर्माण में १ करोड़ से अधिक की लागत आएगी।
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