दो सगे भाइयों को एक जैसी गंभीर बीमारी, उपचार में नहीं मिली सरकारी मदद, अब खाद्यान्न भी बंद

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रीवा। एक परिवार के दो सगे भाई जो जन्म से ही नि:शक्त हैं, वह चल नहीं सकते। उनका भरण पोषण परिवार के लिए किसी समस्या से कम नहीं है। पिता बच्चों की देखरेख करने की वजह से घर के बाहर भी नहीं जा पाता। अपनी क्षमता के अनुसार बच्चों के उपचार की व्यवस्था कराई लेकिन अब आर्थिक संकट इसमें रुकावट बन गया है।

सरकार की ओर से उपचार में कोई मदद नहीं दी जा रही है। बड़ी मुश्किल से विकलांग पेंशन स्वीकृत हुई है लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं है। कुछ समय के लिए राशन दुकान से खाद्यान्न दिया गया लेकिन अब वहां से भी तकनीकी कारण बताते हुए बंद कर दिया गया है।

यह घटनाक्रम सिरमौर क्षेत्र के उमरी गांव के निवासी रामसिंह कुशवाहा के परिवार से जुड़ा है। उनकी तीन संताने हैं जिसमें दो बेटे निखिल कुशवाहा(17) एवं अतुल कुशवाहा(15) जो जन्म से ही नि:शक्त हैं। वह अपनी इच्छा के अनुसार हाथ, पैर नहीं चला सकते, दूसरों पर ही पूरी निर्भरता है। रामसिंह बताते हैं कि बेटी स्वस्थ है लेकिन दोनों बेटे जन्म से ही इसी तरह थे।

जिनका उपचार पहले रीवा में चिकित्सकों से कराया इसके बाद अन्य शहरों में भी दिखाया। मुंबई में भी कई वर्षों तक उपचार कराया लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से उपचार में किसी तरह की आर्थिक एवं चिकित्सीय सहायता नहीं मिलने से अधिक समय तक वह उपचार नहीं करा पाए। अब हताश होकर घर पर ही दोनों की सेवा कर रहे हैं।

शासकीय सहायता के नाम पर विकलांग पेंशन दोनों को छह-छह सौ रुपए मिल रही है। कुछ समय तक खाद्यान्न भी मिला लेकिन अब कहा जा रहा है कि आधार नंबर नहीं होने की वजह से बंद किया गया है। आधार नंबर बनवाने का कई बार प्रयास किया लेकिन आंखों और हाथ के फिंगर का ठीक से मिलान नहीं होने की वजह से आधार नहीं बन पा रहा है। जिसकी वजह से खाद्यान्न एवं अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।

घर पर रहने की मजबूरी, अब कपड़ा सिलाई से चला रहे परिवार
बच्चों के पिता रामसिंह कुशवाहा बताते हैं कि दोनों अब बड़े हो गए हैं इसलिए उनकी देखरेख करने के लिए दो लोगों की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से घर से बाहर नहीं जा पाते हैं। घर पर ही रहकर जीवकोपार्जन के लिए सिलाई मशीन से कपड़े सिलने का काम करते हैं। किसी तरह परिवार का मुश्किल से भरण पोषण हो रहा है। रामसिंह का कहना है कि वह स्वयं शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। बच्चों की परवरिश को लेकर हर समय चिंतित रहते हैं।
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एक्सपर्ट व्यू–

जन्म के समय जो बच्चे नहीं रोते हैं उन्हें इस तरह की दिक्कत होती है। दिमाग ठीक से काम नहीं करता, जिसके चलते वह अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं बना पाते। यदि दोनों सगे भाइयों में एक ही तरह के लक्षण हैं तो अनुवांसिकता का भी असर हो सकता है। कई बार माता को समय पर टीके नहीं लगने से इंफेक्शन भी हो जाता है। जिसका असर बच्चों पर पड़ता है। मरीजों का परीक्षण करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जिस तरह के लक्षण बताए जा रहे हैं, उसमें उम्र बढऩे के बाद सुधार की गुंजाइश कम होती जाती है।
डॉ. सोनपाल जिंदल, न्यूरोसर्जन सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल रीवा
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Patrika Rewa IMAGE CREDIT: patrika


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