मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के आने के बाद भी सोनोग्राफी के लिए भटकते रहे मरीज

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शहडोल। जिला अस्पताल में सिविल सर्जन को हटाने की मांग को लेकर डॉक्टरों का इस्तीफा दिए जाने तथा ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के चलते इलाज की व्यवस्था लडखड़़ा गई है। बुधवार को ओपीडी तथा आकस्मिक ओपीडी सहित अन्य व्यवस्थाओं को संभालने के लिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जिला अस्पताल की कमान संभालते नजर आए। इस दौरान मेडिकल कॉलेज में भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने की वजह से मरीज जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराने और कान को डॉक्टर दिखाने के लिए परेशान रहे।

मरीजों की लग गई कतार
जिला अस्पताल में दोपहर के समय सोनोग्राफी कराने मरीजों की कतार लग गई लेकिन सोनोग्राफी के लिए कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। पिपरिया निवासी प्रमिला बैगा को सोनोग्राफी कराना था। इसके लिए उन्होंने पर्ची काउंटर से पर्ची बनवाया और डॉक्टर को दिखाने के बाद सोनोग्राफी कराने पहुंची लेकिन सोनोग्राफी में कोई डॉक्टर नहीं था। इससे वे परेशान होकर प्राइवेट में सोनोग्राफी कराने चली गई। इसी तरह रमदसन यादव निवासी अर्जूनी के पेट में दर्द रहता था। डॉक्टरों को दिखाने पर उन्होंने सोनोग्राफी के लिए लिखा था। इस पर वे सोनोग्राफी कराने गए लेकिन उन्हें सोनोग्राफी कराने रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिले। इस पर वे भी परेशान होते रहे। इस दौरान विराउड़ी निवासी रामकली बाई अपने बच्चे का विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंची थी लेकिन डॉक्टरों के नहीं मिलने से वे परेशान होकर भटकती रही।

नहीं हो रहे ऑपरेशन
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने से ऑपरेशन भी नहीं हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में भी एक ही बेहोश करने वाला डॉक्टर है। इसके चलते जिला अस्पताल बुधवार को महज एक छोटा ऑपरेशन हुआ जबकि मंगलवार को तीन ऑपरेशन किए गए। वहीं मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के जिला अस्पताल की व्यवस्था संभालने के चलते मेडिकल कॉलेज में इलाज की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

पेट में उल्टे बच्चे का नहीं होगा ऑपरेशन
इस दौरान डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को भी डॉक्टरों के नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक गर्भवती महिला का ऑपरेशन कर डिलीवरी कराने में नर्सो ने हाथ खड़े कर दिए। नर्सो का कहना था कि यहां पर बेहोश करने वाले डॉक्टर नहीं हैं। नीलम गुप्ता पति सूरज कुमार गुप्ता निवासी पाली के पेट में बच्चा उल्टा था। वे मंगलवार को दोपहर एक बजे जिला अस्पताल में पहुंचे थे। इस पर डॉक्टरों ने उन्हें सोनोग्राफी कराने को कहा। इस पर परिजन जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराने डॉक्टर को खोजने लगे लेकिन डॉक्टरों के नहीं होने से जिला अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं हो सका। इससे वे लोग परेशान होकर प्राइवेट में गए और सोनोग्राफी कराया। इस दौरान डॉक्टरों ने सोनोग्राफी देखने के बाद बताया कि बच्चा पेट में उल्टा है। यहां पर इमरजेंसी में ऑपरेशन करने के लिए बेहोश करने वाला डॉक्टर नहीं है। इसलिए ऑपरेशन करने की स्थिति में रेफर किया जा सकता है।



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