31 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल, 1100 टन का लक्ष्य, निकल रही आधी मछली

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शहडोल. बाणसागर बहुउद्देश्यीय परियोजना में मछली पालन भी एक बड़ी आय का जरिया है। जहां प्रतिवर्ष लगभग 1100 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य है। मछुआरों की कमी के चलते लक्ष्य के अनुरूप समितियां मछली उत्पादन नहीं कर पा रही है। प्रतिवर्ष लक्ष्य का आधा मछली उत्पादन हो पा रहा है। जिसके चलते यहां मछलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। लगभग 31 हजार हेेक्टेयर औसत जल भराव क्षमता वाले इस बांध से मछली उत्पादन के लिए महज 21 प्रतिशत मछुआरे ही समितियों के पास है। जिसका प्रभाव वार्षिक लक्ष्य पर पड़ रहा है। जिसे बाणसागर परियोजना प्रबंधन के साथ ही संभागायुक्त ने भी गंभीरता से लिया है। स्थानीय मछुआरों को रोजगार से जोडऩे और ज्यादा से ज्यादा बाणसागर से मछली उत्पादन की दिशा में प्रयास प्रारंभ किए गए हैं।

वर्ष भर में 500 टन ही उत्पादन
जानकारी के अनुसार बाणसागर परियोजना से प्रतिवर्ष ११०० टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिसके विपरीत यहां से ४५०-५०० टन मछली उत्पादन ही हो पा रहा है। इस वर्ष की बात की जाए तो अभी तक लगभग ३२६ टन मछली उत्पादन किया गया है। जबकि पिछले वर्ष पूरे वर्ष भर में लगभग ४९० टन मछली उत्पादन हुआ था।
३००० की क्षमता, ७०० मछुआरे उपलब्ध
बाणसागर परियोजना में मछली उत्पादन के लिए लगभग २६ प्राथमिक मछुआ सहकारी समितियां काम कर रही है। जिसमें शहडोल जिले में ९ समितियों के माध्यम से मछली उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। शेष कटनी, उमरिया और सतना जिले की समितियां मछली उत्पादन करती है। उक्त चारो जिलों को मिलाकर लगभग ३१ हजार ६८५ हेक्टेयर औसतन जलभराव क्षेत्रफल है। जिसमें लगभग १५०० नाव के साथ ३ हजार मछुआरे एक साथ मछली उत्पादन के लिए उतर सकते हैं। विडम्बना यह है कि समितियों के पास इतनी तादाद में मछुआरे ही नहीं है। बताया जा रहा है कि उक्त समितियों के पास महज ७००-८०० मछुआरे ही हैं जिनकी मदद से वर्ष भर मछली उत्पादन कराया जाता है। मत्स्य संघ के पास मछुआरे की कमी के चलते लक्ष्य के अनुरूप मछली उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
सर्वे कर देंगे मछुआरे, संघ दिलाए रोजगार
बाणसागर परियोजना में मछली निकालने का काम करने वाली समितियों के पास मछुआरों की कमी के मामले को कमिश्नर राजीव शर्मा ने गंभीरता से लिया है। वहीं बाणसागर परियोजना प्रबंधन भी इस मुद्दे को उनके समक्ष रखा है। जिसे लेकर उन्होने कहा है कि सर्वे कर वह मछुआरे उपलब्ध कराएंगे समितियां उन्हे रोजगार मुहैया कराए। कमिश्नर ने कहा है कि मछुआरों को तलाश कर उन्हे प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हे समितियों से जोडऩे से रोजगार के अवसर मिलेंगे वहीं बाणसागर परियोजना से लक्ष्य के अनुरूप मछली उत्पादन भी हो सकेगा।
इनका कहना है
समितियों द्वारा मछली उत्पादन का कार्य किया जाता है। मछुआरों की कमी के चलते लक्ष्य के अनुरूप मछली उत्पादन नहीं हो पा रहा है। जिसे लेकर संभागायुक्त के समक्ष बात रखी है। प्रयास किए जा रहे हैं कि स्थानीय मछुआरों को इससे जोड़ा जाए। जिससे उन्हे रोजगार भी मिलेगा और लक्ष्य के अनुरूप मछली उत्पादन भी हो सकेगा।
आशीष उपाध्याय, क्षेत्रीय प्रबंधक बाणसागर परियोजना



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