Congress President: कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस… कमलनाथ और दिग्विजय सिंह में कौन ज्यादा ताकतवार?

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भोपाल: कांग्रेस के अंदर राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर माथापच्ची जारी है। पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता चाहते हैं कि अध्यक्ष गांधी परिवार (congress president election) से ही हो। वहीं, राहुल गांधी स्पष्ट कर चुके हैं कि अध्यक्ष इस बार गांधी परिवार के बाहर से होगा। कांग्रेस अध्यक्ष के लिए शनिवार से नामांकन की शुरुआत होगी। अभी सबसे मजबूत दावेदारी राजस्थान सीएम अशोक गहलोत की है। इसके साथ ही सांसद शशि थरूर भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। इन दोनों की दावेदारी के बीच एमपी से दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के नाम की चर्चा हैं। दिग्विजय सिंह अपने नाम की चर्चा को लेकर गेंद गांधी परिवार के पाले में डाल दिया है। वहीं, इन अटकलों पर कमलनाथ की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पूर्व में वह कहते रहे हैं कि हम एमपी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। वहीं, अगर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह चुनावी मैदान में उतरते हैं तो फिर दोनों में पलड़ा किसका भारी होगा। आइए आपको समझाते हैं।

कमलनाथ और दिग्विजय सिंह… एमपी से ये दो नाम ऐसे हैं, जो ईमानदारी से गांधी परिवार के प्रति वफादारी का निर्वहन कर रहे हैं। तमाम परिस्थितियों में दोनों नेता गांधी परिवार के साथ खड़े रहते हैं। इसके साथ ही गांधी परिवार का भी इनका अटूट भरोसा है। दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश में 10 सालों तक सीएम रहे। साथ ही संगठन में भी महासचिव रहे हैं। बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए लगातार एमपी में संघर्ष कर रहे थे लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले एमपी में कांग्रेस की कमान कमलनाथ के हाथ में चली गई।

कमलनाथ इसमें सफल हुए और 2018 के विधानसभा में एमपी में कांग्रेस का सूखा खत्म हो गया। हालांकि सरकार 15 महीने तक ही चल पाई। कमलनाथ सभी को साधकर चल नहीं पाए। इस मामले में दिग्विजय सिंह कमलनाथ पर भारी पड़ते हैं। वह 10 सालों के शासनकाल में सभी को साथ लेकर चला। सफलतापूर्वक सत्ता का संचालन किया। यह कड़ी कमलनाथ के पक्ष में नहीं है।

कांग्रेस हुई मजबूत
2018 के विधानसभा चुनाव में पिछले चुनावों की तुलना में कांग्रेस को जबरदस्त सफलता मिली थी। 15 सालों बात कांग्रेस सत्ता में आई थी। 15 महीने में सरकार जाने के बाद एमपी में उपचुनाव हुए हैं। उसमें सम्मानजनक नहीं तो लेकिन ठीक-ठाक सफलता मिली। इसके बाद के उपचुनाव में कुछ सीटें बीजेपी के हाथों से छीन लिया। वहीं, हाल ही में निकाय चुनाव हुए हैं। इसमें पहली बार कांग्रेस को पांच नगर निगम में सफलता मिली। कांग्रेस के पांच उम्मीदवार मेयर चुनाव जीत गए। इन सफलताओं से एमपी में कांग्रेस उत्साहित है। ये सब कुछ कमलनाथ के नेतृत्व में हो रहा है। ऐसे में एमपी में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस को एक उम्मीद दिख रही है।

दिग्विजय सिंह को भी संगठन में कई जिम्मेदारी

वहीं, एमपी की जिम्मेदारी से दिग्विजय सिंह इन दिनों मुक्त हैं। पिछले कुछ सालों में उन्हें केंद्रीय संगठन में कई जिम्मेदारी मिली है। दिग्विजय सिंह की गिनती गांधी परिवार के करीबियों में होती है। यही वजह है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावत का अंदाजा होने के बाद दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा गया था। अभी दिग्विजय सिंह के कंधों पर भारत जोड़ो यात्रा की कमान है।

कमलनाथ हैं ‘संकटमोचक’
इसके साथ ही पूर्व सीएम कमलनाथ को गांधी परिवार का संकटमोचक भी कहा जाता है। इंदिरा गांधी उन्हें अपना तीसरा बेटा मानती थीं। गांधी परिवार में कमलनाथ की एंट्री डायरेक्ट है। उन्होंने संजय गांधी के साथ पढ़ाई की थी। इसलिए कमलनाथ की सीधी एंट्री गांधी परिवार के अंदर है। उनका संबंध पारिवारिक है। यही वजह है कि सोनिया गांधी उन पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। पिछले चार सालों में एमपी में सारी चीजें उनके मुताबिक ही हो रही हैं।

दिल्ली में दिग्विजय सिंह से ज्यादा तालमेल
वहीं, कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह की तुलना में दिल्ली में अधिक समय व्यतीत किया है। वह यूपीए की सरकार में मंत्री रहे हैं। साथ ही कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है। इसके साथ ही विवादों से भी दूर रहे हैं। सॉप्ट हिंदुत्व की राह पर चलते हैं। धार्मिक मामलों में टिप्पणी से बचते हैं। बड़े नेताओं से उनके संबंध अच्छे हैं।

दिग्विजय सिंह हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। धार्मिक मामलों में टिप्पणी कर विरोधियों के निशाने पर रहते हैं। एमपी में समय ज्यादा बीतता है। नर्मदा परिक्रमा के दौरान सक्रिय राजनीति से कुछ दिन दूर रहे। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद एमपी में सक्रिय हुए। भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़े और हार गए।

गांधी परिवार से निर्देश मिलने पर फैसला
वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव लड़ने की बात पर दिग्विजय सिंह का कहना है कि मैं गांधी परिवार के प्रति वफादार हूं। वफादारी से कोई समझौता नहीं कर सकता हूं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अगर गांधी परिवार से निर्देश मिलता है तो मैं चुनाव लड़ूंगा। ऐसे में गेंद उन्होंने गांधी परिवार के पाले में डाल दिया है।

कमलनाथ की चुप्पी
कमलनाथ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव लड़ने पर कभी कुछ नहीं बोला है। वहीं, एमपी से अन्य राज्यों की तरह राहुल गांधी के लिए कोई प्रस्ताव भी पारित नहीं हुआ है। कमलनाथ की दावेदारी सिर्फ चर्चाओं में है। उन्होंने खुलकर कभी कुछ नहीं कहा। हां, पूर्व में वह दिल्ली जाने की बात पर यह जरूर कहते रहे हैं कि मैं 2023 तक कहीं नहीं जाने वाला हूं। मैं एमपी में ही रहूंगा।

हालांकि ये आने वाले वक्त ही बताएगा कि दोनों राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नॉमिनेशन दाखिल करते हैं कि नहीं। दोनों की खासियत अलग-अलग है। गांधी परिवार से संबंधों की बात करें तो कमलनाथ कुछ हद तक कथित रूप से दिग्विजय सिंह पर भारी पड़ते हैं।

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