Gwalior Nagar Nigam Election: बीजेपी के लिए तोमर-मिश्रा की जुगलबंदी पर भारी पड़ेगी महाराज की नाराजगी!

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ग्वालियरः मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों (Mp Urban Bodies Election Result) के लिए पहले चरण की काउंटिंग में बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है। अब तक के रुझानों के मुताबिक 11 नगर निगमों के लिए चल रही मतगणना में कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी ज्यादा सीटें जीतती हुई नजर आ रही है। लेकिन महारथियों के गढ़ ग्वालियर में बड़े उलटफेर की संभावना दिख रही है। ग्वालियर में मेयर पद की बीजेपी उम्मीदवार सुमन शर्मा, कांग्रेस की शोभा सिकरवार से लगातार पीछे चल रही हैं। यदि सुमन शर्मा हार जाती हैं तो बीजेपी की चिंताएं बढ़ जाएंगी क्योंकि यह स्पष्ट संकेत है कि ग्वालियर में बड़े नेताओं के बीच मतभेद पार्टी संगठन के प्रयासों पर भारी पर रहे हैं। करीब सवा साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी को अपने नेताओं के बीच की दूरियों को पाटने के लिए गंभीर कोशिशें करनी होंगी।

ग्वालियर दो केंद्रीय मंत्रियों- नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia)- का गृह क्षेत्र है, लेकिन दोनों के बीच मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। मार्च, 2020 में महाराज के बीजेपी ज्वॉइन करने से पहले सिंधिया और तोमर एक-दूसरे के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी थे। उनकी यह प्रतिद्वंद्विता अब भी बरकरार है। दोनों के समर्थक अब भी आपस में भिड़ते रहते हैं। दोनों नेता विरले ही एक मंच पर नजर आते हैं।

बीजेपी संगठन को भी ग्वालियर में सिंधिया और तोमर के बीच मतभेदों का अंदाजा है। समस्या यह है कि सिंधिया से मुकाबले में तोमर को अपनी पार्टी के उन नेताओं का भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग मिल रहा है जो महाराज के बढ़ते प्रोफाइल से चिंतित हैं। शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में अपने साथ सिंधिया और तोमर को लेकर रोड शो किया था।

ग्वालियर में बीजेपी के लिए चुनौतियों की शुरुआत मेयर पद के लिए प्रत्याशी चयन के दौरान ही हो गई थी। पार्टी के अलग-अलग गुट नॉमिनेशन के अंतिम दिन तक मेयर प्रत्याशी को लेकर एकमत नहीं थे। नरेंद्र सिंह तोमर और सिंधिया अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के लिए अड़े हुए थे। अंतिम समय में तोमर को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का साथ मिला। सिंधिया को पटकनी देने के लिए दोनों एक साथ आ गए। दोनों मिलकर पार्टी नेतृत्व को मनाने में सफल रहे, लेकिन उनकी जुगलबंदी पर सिंधिया की नाराजगी शायद भारी पड़ी। सिंधिया के समर्थक कार्यकर्ता सुमन शर्मा के लिए उतने सक्रिय नहीं हो सके। कांग्रेस प्रत्याशी शोभा सिकरवार के पति पहले बीजेपी में थे। शोभा को इसका फायदा भी मिला।



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