मध्य प्रदेश सरकार की पहल, आपके घरों के कचरे से तैयार होगी बायो CNG, सिटी बसों में किया जाएगा इस्तेमाल

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भोपाल
पेट्रोल-डीजल की दिनों दिन मांग बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही दामों में भी बढ़ोत्तरी होती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार सरकार ने वेस्टेज से बायो सीएनसी बनाने के लिए एक एमओयू पर साइन किया है। भोपाल नगर निगम, एनटीपीसी और भोपाल आरएनजी प्राइवेट लिमिटेड ने मंगलवार को बायो-सीएनजी प्लांट में 200 टन प्रति दिन गीला कचरा और 400 टन प्रतिदिन सूखा कचरा टॉरफाइड चारकोल प्लांट स्थापित करने के लिए एक प्रोजेक्टर पर हस्ताक्षर किए।

टॉरफाइड चारकोल प्लांट स्थापित किया जाएगा
दिनों दिन ईंधन की खपत को देखते हुए अब वैकल्पिक ऊर्जा का मार्ग तलाशा जा रहा है। मध्य प्रदेश के सीएम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण समझौता साइन किया गया। भोपाल म्यूनिसिपल कारपोरेशन, एनटीपीसी और भोपाल आरएनजी प्राइवेट लिमिटेड ने एक साथ साइन किया है। अब बायो-सीएनजी प्लांट में 200 टन प्रति दिन गीला कचरा और 400 टन प्रतिदिन सूखा कचरा टॉरफाइड चारकोल प्लांट स्थापित किया जाएगा।

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सिटी बसों में होगा इस्तेमाल
अभी भोपाल शहर से प्रतिदिन लगभग 800 टन कचरा एकत्र किया जाता है। नगर निगम भोपाल इसके निस्तारण पर 333 रुपये प्रति मीट्रिक टन खर्च करता है। इस प्लांट की स्थापना से भोपाल आरएनजी प्राइवेट लिमिटेड भोपाल नगर निगम को अगले 20 वर्षों तक प्रत्येक वर्ष रॉयल्टी के रूप में 83 लाख रुपये और बाजार दर से 5 रुपये कम की दर से बायो-सीएनजी प्रदान करेगा। प्लांट से निकलने वाले बायो-सीएनजी का इस्तेमाल सिटी बसों में किया जाएगा।

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भोपाल नगर निगम को होगी बचत
400 टन प्रतिदिन सूखे कचरे के साथ टॉरफाइड चारकोल प्लांट का निर्माण बिल्ट ऑन ऑपरेट मॉडल पर आधारित होगा। प्लांट की स्थापना और संचालन-रखरखाव का काम एनटीपीसी को खुद 25 साल तक करना है। आदमपुर छावनी में 15 एकड़ क्षेत्र में इसकी स्थापना पर 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका पूरा वहन एनटीपीसी करेगी। उत्पादित टॉरफाइड चारकोल का उपयोग एनटीपीसी के बिजली संयंत्रों में किया जाएगा। प्लांट से नगर निगम भोपाल को ठोस कचरा निस्तारण पर हर साल 4.86 करोड़ रुपये की बचत होगी।



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