Lucknow News: जाति का स्टिकर लगाया तो जब्त होगा आपका वाहन, जानें क्या हो सकती है कार्रवाई

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हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊउत्तर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों पर जातिसूचक शब्दों के स्टिकर लगाकर घूमने वालों की अब खैर नहीं होगी। हाल ही में महाराष्ट्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) को पत्र भेजा था। इस खत में उन्होंने यूपी की सड़कों पर दौड़ने वाले ‘जातिवादी वाहनों’ से समाज को होने वाले खतरे के बारे में बताया था। इसके बाद पीएमओ ने यूपी सरकार को ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे।

अभियान चलाकर कार्रवाई करने का दिया आदेश
वाहन पर पंजीकरण संख्या उसके लिए एक पहचान चिह्न होता है, लेकिन इसके साथ ही लोग उस पर अपनी जाति या धर्म की पहचान को उजागर करते हुए अलग प्रकार का चिन्ह बनवा लेते हैं। परन्तु अब ऐसे वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई करने का आदेश जारी हो गया है। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर सीज करने या धारा 177 में चालान करने का आदेश जारी किया है।

‘गैरकानूनी और सामाजिकता के भी खिलाफ है प्रचलन’
प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर भी जातिसूचक शब्दों के स्टिकर लगे सैकड़ों वाहन रोजाना रफ्तार भरते दिख जाते हैं। लखनऊ में दो पहिया और 4 पहिया वाहनों की कुल संख्या लगभग 25 लाख से ऊपर है। जातिवादी स्टिकर लगाकर घूमने वाले वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है। महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक हर्षल प्रभु ने आईजीआरएस पर प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर कर ऐसे विषयों की तरफ ध्यान देने को कहा था।

पत्र में उन्होंने कहा कि यूपी में वाहनों पर जाति लिखकर लोग गर्व महसूस करते हैं। इससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है, साथ ही यह कानून के खिलाफ भी है। लखनऊ के डीसीपी ट्रैफिक संजीव सुमन ने
एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि आदेश के बाद ऐसे वाहनों पर लगातार तेजी से कार्रवाई की जा रही है। वाहनों को सीज करने के साथ उनके चालान भी किये जा रहे हैं।

दोस्त ने बताया यूपी की सड़कों का हाल तो मिली प्रेरणा
हर्षल प्रभु मुंबई के उपनगर कल्याण में रहते हैं। उन्होंने
एनबीटी ऑनलाइन को बताया, ‘वाहन पर भी जाति लिखना सामाजिक ताने-बाने के लिए अच्छा नहीं है। अपनी जाति और धर्म पर कोई गर्व कर सकता है लेकिन अपने वाहनों पर उन्हें लिखकर हम यातायात के नियमों को तो तोड़ते ही हैं साथ ही जाति को लेकर होने वाली हिंसा को बढ़ावा भी देते हैं। यूपी में भी ऐसा खूब होता है।’

हर्षल आगे कहते हैं, ‘मुझे इसके बारे में यूपी के दोस्त आशीष कनौजिया से पता चला था। इसके बाद मैंने इस पर देश के प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित कराने के लिए उन्हें पोर्टल के माध्यम से मामले की जानकारी दी।’ हर्षल के अनुसार वे अकसर सामाजिक विषयों पर जिम्मेदारों को लिखते रहते हैं। पिछले दिनों उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के डैम, मानव तस्करी, कोरोना आइसोलेशन सेंटरों की दुर्गति आदि पर भी शिकायतें की थीं। इनमें से ज्यादातर विषयों को संज्ञान में भी लिया गया था।



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