Sister Abhaya Case: आधी रात पादरी-नन को साथ देखा फिर… एक केस जिसमें ‘भगवान के अदृश्य हाथ ने पकड़े हत्यारे’

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क्राइम ब्रांच ने लंबी-चौड़ी तफ्तीश के बाद अपनी रिपोर्ट दी कि यह हत्या नहीं सूइसाइड है। केस में फिर CBI टीम की एंट्री होती है। और जांच के बाद बात पहले वाली ही निकलती है। CBI की यह टीम भी यही रिपोर्ट देती है कि यह हत्या नहीं सूइसाइड ही है। 16 साल बाद आखिर जब सीबीआई की तीसरी रिपोर्ट आती है, तो इसमें धुंधला सा इशारा होता है कि यह हत्या भी हो सकती है। केरल में सबसे बड़ी पहेली बने सिस्टर अभया की मौत में फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी पर केस दर्ज होता है। 28 साल बाद 22 दिसंबर 2020 में दोनों दोषी करार दिए जाते हैं। इस केस को सुलझाने में भगवान का अदृश्य हाथ था… इस केस ने जिस तरह से मोड़ लिए और कातिल पकड़े गए, सिस्टर अभया के भाई के भावुक बयान पर एकबारगी यकीन होता है। साथ ही इस कहावत पर भी कि- खून बोलता है। यह मर्डर मिस्ट्री शुरू होती है आज से ठीक 28 साल पहले 1992 की अलसुबह से। सुबह के करीब साढ़े तीन बज रहे थे। 21 साल की सिस्टर अभया का गला सूख रहा था। वह पानी पीने के लिए उठीं और किचन की तरफ चल दीं। किचन के पास कोने में रखे फ्रिज से उन्होंने पानी निकालकर पिया और फिर…

केरल के कोट्टयम के सेंट पायस कॉन्वेंट में रहने वाली सिस्टर अभया की मौत के 28 साल बाद सीबीआई अदालत ने मंगलवार को एक पादरी और नन को उनकी हत्या का दोषी पाया। 21 वर्षीय अभया की मौत से हत्या तक की क्राइम स्टोरी बहुत सारे मोड़ों से गुजरी और आखिरकार कातिल तक पहुंच ही गई…

Sister Abhaya Case: आधी रात पादरी-नन को साथ देखा फिर... एक केस जिसमें 'भगवान के अदृश्य हाथ ने पकड़े हत्यारे'

क्राइम ब्रांच ने लंबी-चौड़ी तफ्तीश के बाद अपनी रिपोर्ट दी कि यह हत्या नहीं सूइसाइड है। केस में फिर CBI टीम की एंट्री होती है। और जांच के बाद बात पहले वाली ही निकलती है। CBI की यह टीम भी यही रिपोर्ट देती है कि यह हत्या नहीं सूइसाइड ही है। 16 साल बाद आखिर जब सीबीआई की तीसरी रिपोर्ट आती है, तो इसमें धुंधला सा इशारा होता है कि यह हत्या भी हो सकती है। केरल में सबसे बड़ी पहेली बने सिस्टर अभया की मौत में फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी पर केस दर्ज होता है। 28 साल बाद 22 दिसंबर 2020 में दोनों दोषी करार दिए जाते हैं।

इस केस को सुलझाने में भगवान का अदृश्य हाथ था… इस केस ने जिस तरह से मोड़ लिए और कातिल पकड़े गए, सिस्टर अभया के भाई के भावुक बयान पर एकबारगी यकीन होता है। साथ ही इस कहावत पर भी कि- खून बोलता है। यह मर्डर मिस्ट्री शुरू होती है आज से ठीक 28 साल पहले 1992 की अलसुबह से। सुबह के करीब साढ़े तीन बज रहे थे। 21 साल की सिस्टर अभया का गला सूख रहा था। वह पानी पीने के लिए उठीं और किचन की तरफ चल दीं। किचन के पास कोने में रखे फ्रिज से उन्होंने पानी निकालकर पिया और फिर…

सिस्टर अभया ने सुनी कुछ आवाजें
सिस्टर अभया ने सुनी कुछ आवाजें

पानी पीने के बाद जैसे ही सिस्टर अभया लौट रही थी कि उन्होंने कुछ आवाजें सुनी। यह आवाज किचन के अंदर से आ रही थी।अंदर झांककर देखा तो उन्हें अपनी आंखों पर एकबारगी यकीन नहीं हुआ। फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी आपत्तिजनक अवस्था में थे। और इसी क्षण फादर ने भी अभया को देख लिया।

फादर और सोफी ने कर दिया हमला
फादर और सोफी ने कर दिया हमला

इससे पहले की सिस्टर अभया भाग पातीं फादर कोट्टूर और सिस्टर सोफी ने उन्हें पकड़ लिया और उसका मुंह दबा दिया क्योंकि वह चीखने की कोशिश कर रही थीं। सिस्टर सोफी किचन से एक कुल्हाड़ी ले आई और उससे अभया से सिर पर हमला किया। हमले के बाद अभया जमीन पर गिर गईं और बेजान हो गईं।

फादर ने कुएं में डाल दिया अभया का शव
फादर ने कुएं में डाल दिया अभया का शव

बेजान पड़े सिस्टर अभया के शव को फादर कोट्टूर और सिस्टर सोफी ने घसीटते हुए पास के कुएं में डाल दिया। अभया की एक चप्पल और पानी का बोतल किचन के दरवाजे पर पड़ा था जिसे बाद में आरोपियों ने नष्ट कर दिया था।

भगवान ने यूं दिया न्याय
भगवान ने यूं दिया न्याय

पहले स्थानीय पुलिस और फिर अपराध शाखा ने मामले की जांच की और कहा कि यह खुदकुशी का मामला है। सीबीआई ने 2008 में मामले की जांच अपने हाथ में ली। इस मामले में सुनवाई पिछले साल 26 अगस्त को शुरू हुई और कई गवाह मुकर गए। 1992 में हुई इस हत्या की जांच करने वाले सीबीआई के डीएसपी वर्गीज पी थामस ने सबसे पहले इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि यह हत्या है। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर कहा कि इस मामले में न्याय होगा। आंसू भरे आंख से उन्होंने कहा कि उनकी जांच सही थी। जब वरिष्ठ अधिकारियों ने इस केस को बंद करने के लिए थामस पर दबाव दिया तो वह 10 साल पहले ही सर्विस से रिटायर हो गए। इस केस में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जी जान लगाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता जोमन पुथेनपूराक्कल ने कहा कि जब इस केस को बंद करने की कोशिश हो रही थी तो भगवान के हाथों ने इसमें न्याय दिलाने में मदद की।

जब कोर्ट ने माना दोषी तो रोने लगी सिस्टर सोफी, फादर की आंखें पथरा गई
जब कोर्ट ने माना दोषी तो रोने लगी सिस्टर सोफी, फादर की आंखें पथरा गई

जब सीबीआई की कोर्ट ने फादर कोट्टूर और सिस्टर सोफी को इस हत्या का दोषी ठहराया तो दो सिस्टर सोफी रोने लगी जबकि फादर की आंखें पथरा गई। कोर्ट के आदेश के बाद फादर ने कहा कि वह इस मामले में निर्दोष है और उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। मैं भगवान की योजना के तहत आगे बढ़ूंगा।



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