जहां कभी होते थे चुनावों के बहिष्कार, उसी जम्मू-कश्मीर में DDC Elections ने केंद्र को कैसे दी बड़ी उम्मीद?

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भारती जैन, श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में संपन्न हुए जिला विकास परिषद के चुनाव ने अपने परिणाम के बाद केंद्र की मोदी सरकार को एक सकारात्मक उम्मीद दे दी है। कभी चुनावी बहिष्कार के दिन देख चुके जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद के इलेक्शन में लोगों की भागीदारी देखने से एक ओर जहां केंद्र सरकार उत्साहित है, वहीं दूसरी ओर सरकार को 370 के अंत के बाद हुए चुनाव के परिणाम से राज्य का जीवन पटरी पर लौटता दिखने लगा है। ये सारी चुनाव उस पृष्ठभूमि पर हुए हैं, जिसमें 370 के अंत के बाद घाटी में उमड़ी अनिश्चितता और तमाम राजनीतिक बयान देखे गए थे। अब इन सब के बीच राजनीतिक गतिविधियों की कहाली एक सकारात्मक कदम जैसी है।

केंद्र सरकार के एक बड़े अफसर कहते हैं, ‘एक वक्त में पाकिस्तान की क्रिकेट मैच में जीत पर भी कश्मीर की गलियों में आतिशबाजी होती थी। आज स्थितियां वैसी नहीं हैं। कश्मीर में राजनीतिक विरोध के बावजूद गुप्कार अलायंस से लेकर हर राजनीतिक पार्टी ने चुनाव, चुनाव की प्रक्रिया और इसके फैसले का खुले मन से स्वागत किया। लोगों ने एक बड़ी संख्या में चुनावों में अपने वोट डाले और सब शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। इस चुनाव ने केंद्र के मन में विधानसभा चुनाव को लेकर एक उम्मीद जगा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में असेंबली इलेक्शन कराने को लेकर भी फैसले हो सकते हैं। ये बताता है कि जम्मू-कश्मीर की आवाम सिर्फ जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकास को लेकर अपना जनादेश देना चाहती है।’

सभी पार्टियों का चुनाव में उतरना भी सकारात्मक कदम
केंद्र के तमाम नौकरशाह भी यह कहते हैं कि कश्मीर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों का साथ आना, राज्य के विकास के लिए एक शुभ संकेत है। ये वही कश्मीर है, जहां कुछ वक्त पहले पंचायत चुनावों में मुख्य दलों ने हिस्सा नहीं लिया था। ऐसे में सभी पार्टियों का डीडीसी चुनाव में साथ आना लोकतंत्र में सबकी भागीदारी सुनिश्चित होने का संकेत है।

बीजेपी अब पूरे जम्मू-कश्मीर की पार्टी: जितेंद्र सिंह
केंद्र सरकार के मंत्री और राज्य की उधमपुर सीट से सांसद जितेंद्र सिंह कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में डीडीसी चुनाव के परिणाम बीजेपी और पूरे राज्य के लिए सकारात्मक हैं। जितेंद्र सिंह का कहना है कि डीडीसी चुनाव ने बीजेपी को जम्मू-कश्मीर के हर हिस्से की पार्टी बना दिया है। कश्मीर में भी पार्टी की सफलता एक सुखद संकेत है।

जहां नहीं होता था मतदान, वहां भी जमकर वोटिंग
वहीं केंद्र के अफसर वोटरों की एक बड़ी भागीदारी को भी एक अच्छे संकेत के रूप में देख रहे हैं। कश्मीर घाटी के जिन इलाकों में पंचायत और लोकसभा चुनाव में बेहद कम वोटिंग देखने को मिली थी, वहां डीडीसी चुनाव में पहले की अपेक्षा अच्छा वोटर टर्नआउट देखने को मिला। मसलन श्रीनगर शहर में जहां लोकसभा चुनाव में कुल 7.9 फीसदी और पंचायत चुनाव में 14.5 फीसदी वोट पड़े, वहीं डीडीसी चुनाव में 35.3 फीसदी मतदान हुआ। इसके अलावा पुलवामा के अवंतिपोरा में लोकसभा चुनाव में कुल 3 फीसदी और पंचायत चुनाव में 0.4 फीसदी वोटिंग हुई। इसकी अपेक्षा डीडीसी चुनाव 9.9 फीसदी वोटिंग हुई। ऐसे में ठंड के मौसम के बावजूद लोगों की चुनावी प्रक्रिया में इतनी बड़ी भागीदारी को लेकर केंद्र काफी उत्साहित है।



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