UP: जामताड़ा वालों के पास पहुंचा ट्रेजरी का डेटा, रिटायर्ड अफसरों की पेंशन निशाने पर

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लखनऊ
यूपी में ट्रेजरी ऑफिसर बनकर लगातार लोगों को साइबर जालसाज अपना निशाना बना रहे हैं। सबसे अधिक सचिवालय से रिटायर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों से ठगी की जा रही है। इन जालसाजों के पास पीड़ितों की डिटेल पहले से ही होती है। पीड़ितों ने इस संबंध में साइबर क्राइस सेल, साइबर थाने, अपर मुख्य सचिव (गृह) से लेकर मुख्यमंत्री तक से शिकायत की है, लेकिन साइबर जालसाजों पर पुलिस अंकुश नहीं लगा पा रही है। पुलिस इस गिरोह को पकड़ ले तो बुजुर्गों की पेंशन में सेंधमारी को रोका जा सकता है।

अधिकतर पेंशन अपडेट करने के नाम पर करते हैं कॉल
साइबर क्राइम सेल के सूत्रों के मुताबिक ट्रेजरी ऑफिसर बनकर पेंशन में सेंध लगाने के प्रयास की कई शिकायतें आईं हैं। पिछले दो महीने में करीब 5 मामले ऐसे भी आए जिसमें जालसाज रुपये निकालने में सफल रहे। इसके अलावा ऐसे ही कई मामलों की शिकायतें साइबर क्राइम थाने में भी की गई हैं। पीड़ितों से बातचीत में सामने आया है कि कभी पेंशन में हुई बढ़ोतरी को अपग्रेड करने तो कभी जीवित प्रमाण पत्र अपडेट करने के नाम पर भी लोगों को जाल में फंसाया जाता है। कुछ लोगों को उनका पेंशन अकाउंट बंद होने का झांसा दिया गया था।

कहीं लीक तो नहीं किया जा रहा डेटा
पीड़ितों को शक है कि कहीं उनका डाटा ट्रेजरी या बैंक से लीक तो नहीं किया जा रहा है। पीड़ितों ने बताया कि कॉल करने वाले को उनके पेंशन खाते का नम्बर, नाम व किस पद से वह रिटायर्ड हुए सहित तमाम गोपनीय जानकारी होती है। जालसाज जब उनकी ये डिटेल उन्हें बताता है तो वह विश्वास कर लेते हैं। इसके बाद जालसाज उनसे कुछ और जानकारियों लेकर खाता खाली कर देते हैं। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस को ट्रेजरी ऑफिस और संबंधित बैंक के अधिकारियों से पूछताछ करनी चाहिए।

जालसाज का सरनेम अधिकतर मामले में त्रिपाठी
पीड़ितों से बातचीत में सामने आया कि अधिकतर मामले में जालसाज का सरनेम त्रिपाठी था। अलीगंज निवासी पीड़ित ने बताया कि जालसाज ने उन्हें वीके त्रिपाठी बनकर कॉल की थी। वहीं, गोमतीनगर निवासी पीड़ित गुलाब चन्द्र पाल ने बताया कि जालसाज ने उन्हें एसके त्रिपाठी बनकर कॉल की थी, जबकि पीड़ित राम सिंह को बीके त्रिपाठी बनकर कॉल की गई। अन्य पीड़ितों से बातचीत में भी जालसाज का सरनेम त्रिपाठी होना सामने आया है।

जामतारा, मथुरा और भरतपुर के गैंग शामिल
एसपी साइबर क्राइम त्रिवेणी सिंह के मुताबिक आशंका है कि ट्रेजरी से डेटा लीक हो गया है। 20 से 25 लोगों ने शिकायत की है कि ट्रेजरी अफसर बनकर उनके खाते से रुपये निकाल लिए गए। कॉल करने वाले के पास पीड़ितों की गोपनीय जानकारी होती है। एसपी साइबर क्राइम ने बताया कि उनकी टीम ऐसे मामलों की पड़ताल में लगी है। गैंग जामतारा से सक्रिय है। यह गैंग अधिकतर रिटायर्ड लोगों को निशाना बना रहा है। इसके अलावा मथुरा और भरतपुर से भी गैंग सक्रिय हैं। उनका कहना है कि गैंगों पर नजर रखी जा रही है। उन्हें जल्द ही पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी पीड़ित उनसे मोबाइल नंबर – 9454400581 पर फोन या वॉट्सऐप के जरिए उनसे संपर्क कर सकता है। साइबर क्राइम सेल के अधिकारियों के मुताबिक कुछ दिन पहले जामतारा से एक जालसाज को गिरफ्तार भी किया था। वह लगातार रिटायर्ड लोगों को शिकार बना रहा था।

रहें सतर्क, कोषागार से नहीं की जाती है कॉल
मुख्य कोषाधिकारी स्वतंत्र गुप्ता के मुताबिक कोषागार से किसी भी पेंशनर्स को कोई भी कर्मचारी या अधिकारी डेटा अपडेशन के लिए कॉल नहीं करता है। यह निर्देश है कि पेंशनर्स को कॉल कर उनसे कोई भी डेटा नहीं मांगा जाएगा, इसलिए अगर कोई भी शख्स कोषागार का अधिकारी या कर्मचारी बताकर फोन कर डेटा मांगता है तो पेंशनर्स उससे सावधान रहें। इसके अलावा अगर पेंशनर्स को कोई समस्या हो तो वह किसी भी वर्किंग-डे में कोषागार कार्यालय के फोन नंबर-0522-2288481 पर सुबह 10 से शाम पांच बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं। पेंशन के लिए ई-मेल tojbn@nic.in या पेंशन विवरण के लिए koshvani.up.nic.in पर जाया जा सकता है।

केस-1 एक दिसंबर को सचिवालय से निजी सचिव के पद से रिटायर्ड गोमतीनगर के विपुलखंड निवासी गुलाब चन्द्र पाल के पास एक कॉल की गई। कॉल करने वाले ने खुद को ट्रेजरी अधिकारी बताकर पीड़ित से अहम जानकारी हासिल की। इसके बाद उनके खाते से 9,84,874 रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने अपर मुख्य सचिव गृह को भी मामले की छानबीन के लिए पत्र लिखा था।

केस-2 आठ दिसंबर को सचिवालय से सेवानिवृत्त समीक्षा अधिकारी राम सिंह को ट्रेजरी ऑफिसर बनकर साइबर जालसाजों ने फोन किया और डिटेल लेकर उनके खाते से 4,40,800 रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने ऑनलाइन शिकायत करने के साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच किरवाए जाने का अनुरोध किया है।

केस-3 16 दिसंबर को अलीगंज निवासी सचिवालय से रिटायर्ड एक अधिकारी को भी ट्रेजरी अधिकारी बनकर जालसाज ने अपना निशाना बनाया। पीड़ित से जुड़ी अहम जानकारी उन्हें बता कर विश्वास जीता और फिर उनके खाते से 13,21,763 रुपये निकाल लिए।

केस-4 सितंबर में महानगर निवासी मनीष राघव की मां रूपेश के मोबाइल फोन पर किसी कुलदीप ने कॉल की। उसने ट्रेजरी से बोलने की बात कहते हुए पेंशन अकाउंट बंद होने की जानकारी दी और बातों में फंसाकर ओटीपी पूछ लिया। इसके बाद उनके खाते से 74 हजार रुपये निकल गए।



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