हर स्थिति के लिए खुद को तैयार रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं हमारी तीनों सेनाएं

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तीनों सेनाओं में भर्ती की नयी योजना अग्निपथ के तहत जहां इस समय अग्निवीर कड़े प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं वहीं तीनों सेनाएं अपने अभ्यास कार्यक्रमों के जरिये खुद को हर स्थिति का सामना करने के लिए भी तैयार कर रही हैं। भारत रक्षा क्षेत्र में जहां आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है वहीं तकनीक के सहयोग से खुद को रक्षा क्षेत्र में सबसे उन्नत बनाने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है। इस समय देश में तीनों सेनाओं के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अलग-अलग तरह के अभ्यास कार्यक्रम चल रहे हैं। कहीं तीनों सेनाएं खुद अभ्यास कर रही हैं तो कहीं मित्र देशों की सेनाओं के साथ। उद्देश्य यही है कि हर स्थिति का दक्षता के साथ सामना करने के लिए खुद को तैयार रखा जाये।
नौसेना की बात करें तो हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी सेना की बढ़ती मौजूदगी के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में युद्धक तैयारी की परख के लिए बड़ा युद्धाभ्यास कर रही है जिसमें युद्धपोत, पनडुब्बी और विमान जैसी उसकी लगभग सभी सामरिक संपत्तियां शामिल हैं। बताया जा रहा है कि थिएटर स्तरीय सामरिक तैयारी अभ्यास (ट्रोपेक्स) के तहत नौसेना के विध्वंसक पोतों, युद्धपोतों, कार्वेट, पनडुब्बियों और विमानों सहित नौसेना की विभिन्न लड़ाकू इकाइयों को जटिल समुद्री परिचालन तैनाती से गुजारा जाता है। सामरिक तैयारी अभ्यास ट्रोपेक्स जनवरी से लेकर मार्च तक की तीन महीने की अवधि के दौरान आयोजित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसमें न सिर्फ नौसेना की सभी इकाइयों बल्कि थल सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल से जुड़ी परिसंपत्तियों की भी भागीदारी होती है।

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नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने इस संबंध में मीडिया को दी गयी जानकारी में बताया था कि अभ्यास के तहत नौसेना के विध्वंसक पोतों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानों सहित नौसेना की सभी लड़ाकू इकाइयों की परख के लिए इन्हें जटिल समुद्री परिचालन तैनाती से गुजारा जाता है। उन्होंने कहा कि यह अभ्यास हथियारों से प्रत्यक्ष फायरिंग सहित युद्ध संचालन के विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए विभिन्न चरणों में बंदरगाह और समुद्र दोनों में आयोजित किया जा रहा है। देखा जाये तो पिछले कुछ वर्षों में कार्यक्षेत्र और जटिलता में वृद्धि होने के बाद, यह अभ्यास बहु स्तरीय खतरे वाले वातावरण में काम करने के लिए भारतीय नौसेना के संयुक्त बेड़े की लड़ाकू तैयारी का परीक्षण करने का अवसर भी प्रदान करता है।
हम आपको बता दें कि यह समुद्री अभ्यास थल सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल के साथ संचालन स्तर के आदान-प्रदान की सुविधा भी देता है, जोकि एक जटिल वातावरण में अंतर-संचालनात्मकता तथा संयुक्त अभियान को और मजबूती प्रदान करेगा। इसी तरह, नौसेना ने 17 से 22 जनवरी तक आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में तीनों सेवाओं के द्विवार्षिक अभ्यास (एम्फेक्स) 2023 का भी आयोजन किया था। एम्फेक्स का उद्देश्य आपसी तालमेल को बढ़ाने के लिए सहयोग सहित संचालन के विभिन्न पहलुओं में सेना के तीनों अंगों के विभिन्न घटकों को संयुक्त प्रशिक्षण प्रदान करना है।
एम्फेक्स-23 अभ्यास पहली बार काकीनाडा में आयोजित किया गया और यह अब तक का सबसे बड़ा समन्वित अभ्यास था। इस पांच दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कई संयुक्त अभियान संचालित किए गए जिसमें बड़ी संख्या में सैनिकों ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास में नौसेना के बड़े प्लेटफॉर्म वाले डॉक (एलपीडी), लैंडिंग शिप और लैंडिंग क्राफ्ट, मरीन कमांडो (मार्कोस), हेलीकॉप्टर तथा विमानों सहित तीनों सेनाओं के कई जहाजों की भागीदारी हुई। थल सेना ने अपने 900 से अधिक सैनिकों के साथ इस अभ्यास में भाग लिया और इस दौरान उनके साथ विशेष बल, तोपखाने तथा बख्तरबंद वाहन भी शामिल थे। वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमानों और सी-130 विमानों ने भी अभ्यास में भाग लिया।
देखा जाये तो एम्फेक्स 2023 ने भारत की जल-थल-नभ सैन्य कुशल क्षमताओं का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया और इस दौरान तीनों सेवाओं के संयुक्त संचालन के पूर्ण स्पेक्ट्रम को कवर करने के लिए तीनों सेनाओं के बीच स्थापित उत्कृष्ट समन्वय को प्रदर्शित किया गया।
इसके अलावा यह भी बताया जा रहा है कि भारतीय वायुसेना अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ नए सिरे से बढ़े तनाव के मद्देनजर अपनी युद्ध तैयारियों को परखने के लिए अगले महीने के शुरुआत में पूर्वोत्तर क्षेत्र में युद्धाभ्यास करेगी। ‘पूर्वी आकाश’ नाम से होने वाले इस युद्धाभ्यास में वायुसेना के राफेल और सुखोई-30एमकेआई सहित अग्रणी लड़ाकू विमानों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। वायुसेना का शिलॉन्ग मुख्यालय वाला पूर्वी वायु कमान यह युद्धाभ्यास करेगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी की वजह से यह युद्धाभ्यास दो साल के अंतराल के बाद होने वाला है।
वहीं, तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना के बीच पिछले महीने झड़प के बाद अरुणाचल प्रदेश के पहले दौरे में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की सैन्य तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। जनरल पांडे ने अपनी यात्रा के दौरान शेष अरुणाचल प्रदेश (आरएएलपी) में चीन के साथ वास्तविक सीमा के साथ-साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कुछ अन्य चौकियों का दौरा किया। इस दौरान अरुणाचल प्रदेश में वरिष्ठ कमांडरों ने सेना प्रमुख को सीमावर्ती क्षेत्रों में समग्र सुरक्षा परिदृश्य के बारे में जानकारी दी। हम आपको याद दिला दें कि जनरल पांडे ने 12 जनवरी को कहा था कि चीन के साथ सीमा पर स्थिति ‘‘स्थिर’’ लेकिन ‘‘अप्रत्याशित’’ है और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से भारतीय सैनिकों को तैनात किया गया है।
देखा जाये तो पूर्वी लद्दाख के अलावा, भारतीय सेना अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में एलएसी के साथ बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के बाद, भारतीय सेना ने एलएसी के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्र में भी अपनी परिचालन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है।
-गौतम मोरारका



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