परिवारवाद और आतंकवाद के चंगुल में फंसा जम्मू कश्मीर आज राष्ट्रवाद और विकासवाद का झंडा बुलंद कर रहा: तरुण चुघ

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भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने कहा कि जम्मू कश्मीर से भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के लिए हमेशा से आत्मीयता का नाता रहा है। कश्मीर है, वह मार्ग है विकास का, राष्ट्रवाद का, उज्ज्वल भविष्य का, राष्ट्रीय एकता और अखंडता का। जनसंघ से लेकर भाजपा तक कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हुए इसके लिए अनवरत संघर्ष किया। जनसंघ के समय से ही एक देश में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान का नारा लगाते रहे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर के लिए स्वतंत्र भारत के पहले बलिदानी बने। 

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चुघ ने कहा कि हम इसे बूथ स्तर तक धारदार बनाएं, यह हमारा ध्येय होना चाहिए। आजादी के बाद से ही जम्मू कश्मीर को तुष्टिकरण की राजनीति के कारण अलग थलग रखा गया।अगस्त 2019 भारत और जम्मू-कश्मीर के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। इसी दिन सात दशक से अखंड भारत, एक भारत की चिरप्रतीक्षित मांग पूरी हुई और कश्मीर की कश्मीरियत लौटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में विकास और विश्वास का उदय होते ही इसकी तस्वीर और तकदीर बदल गई। 
तरुण चुघ ने कश्मीर की स्थिति पर कहा कि जो कश्मीर भय और देश विरोधी ताकतों का अड्डा हुआ करता था, वहां देशभक्ति का माद्दा दिख रहा है। कभी परिवारवाद और आतंकवाद के चंगुल में फंसा कश्मीर आज राष्ट्रवाद और विकासवाद का झंडा बुलंद कर रहा है। एक देश में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान का सपना साकार हुआ। अखंड भारत, एक भारत, समर्थ भारत और सशक्त भारत की लकीर कश्मीर में खींच दी गई। जम्मू-कश्मीर का  सामाजिक, भौगोलिक और आर्थिक एकीकरण सुनिश्चित हो गया है। और अब आतंकवाद और परिवारवाद का अस्त हुआ तो खुशहाल कश्मीर की तस्वीर दुनिया को दिखने लगी।विकासवाद और राष्ट्रवाद की रौशनी ने कश्मीर को अपना गौरवमयी पहचान दी है। इसी का परिणाम रहा कि आजादी के अमृत वर्ष में पहली बार कश्मीर का लालचौक तिरंगामय होकर भारत माता की जय के उदघोष से गूंजा।

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 चुघ ने जम्मू कश्मीर की राजनीतिक स्थिति पर कहा कि धारा 370 से आजादी के एक साल बाद यहां गांवों के साथ जनपद और जिला पंचायत के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए। कई वर्षों के बाद सन 2018 में पंचायत चुनाव हुए और इसमें 74.1 फीसदी मतदान हु आ। सन 2019 में पहली बार आयोजित ब्लॉक डेवलेपमेंट काउंसिल चुनाव में 98.3 फीसदी मतदान हुआ। जिला स्तर के चुनाव में भी रिकॉर्ड भागीदारी हुई। वाल्मीकि समुदाय, गोरखा लोगों और पश्चिमी पाकिस्तान से उजाड़े और खदेड़े गए शरणार्थियों को पहली बार राज्य में होने वाले चुनाव में मत देने का अधिकार मिला। मूल निवासी कानून लागू किया गया। नई मूल निवासी परिभाषा के अनुसार 15 वर्ष या अधिक समय तक जम्मू- कश्मीर में रहने वाले व्यक्ति भी अधिवासी माने जाएंगे। 1990 में कश्मीर घाटी से भगाए गए कश्मी री पंडितों को फिर से बसाने का रास्ता साफ हो गया है। कश्मीरी प्रवासियों की वापसी के लिए नौकरियों और पारगमन आवासों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। जम्मू-कश्मीर से बाहर विवाह करने वाली लड़कियों और उनके बच्चों के अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।   

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 चुघ ने अंत में कहा कि अंत्योदय के मूलमंत्र और सबका साथ, सबका विकास व सबका विश्वाषस की भावना के प्रति समर्पित नरेंद्र मोदी सरकार ने दशकों तक उपेक्षित जम्मू-कश्मीर में विकास को नई रफ्तार दी है। जम्मू और कश्मीर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल रही है और शीघ्र ही जम्मू कश्मीर देश के विकसित राज्यों की पंक्ति में आकर खड़ा होगा।



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