Jan Gan Man: Ramcharitmanas पर प्रतिबंध की मांग और Bageshwar Dham पर उठ रहे सवालों पर VHP प्रवक्ता का साक्षात्कार

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नमस्कार प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम जन गण मन में आप सभी का स्वागत है। आज बात करेंगे रामचरितमानस और सनातन धर्म पर उठ रहे सवालों की। कार्यक्रम में हमारे साथ चर्चा के लिए उपस्थित रहे विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल जी। प्रभासाक्षी ने उनसे बातचीत में रामचरितमानस के खिलाफ आ रहे नेताओं के बयानों पर उनकी प्रतिक्रिया तो जानी ही साथ ही बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़ रहे विवादों पर भी उनकी राय जानी गयी। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश-
प्रश्न-1. राम के देश में राम पर हमला हो रहा है। राम कथा को विवादित बनाया जा रहा है। यह कौन-सी मानसिकता है?
उत्तर- देखिये पहले ये लोग राम मंदिर आंदोलन का विरोध करते थे। फिर इन्होंने मंदिर का विरोध शुरू किया। उसके बाद अब जब मंदिर निर्माण पूरा होने की तारीख सामने आ चुकी है तो यह आसुरी शक्तियां राम के खिलाफ बोल रही हैं। यह लोग जानते हैं कि हिंदू समाज में कोई सर तन से जुदा वाला गैंग नहीं है और हिंदू सहिष्णु समाज है इसीलिए यह लोग हिंदू आस्थाओं के प्रतीकों पर हमला करते रहते हैं। लेकिन समय-समय पर वक्त ऐसे लोगों को खुद सजा देता है। 
प्रश्न-2. रामचरितमानस पर प्रतिबंध की मांग की जा रही है, कुछ छंदों पर सवाल उठाकर उन्हें हटाये जाने की मांग की जा रही है। इस पर विश्व हिंदू परिषद की क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर- जो लोग ऐसी मांग कर रहे हैं क्या उन्होंने पूरी रामचरितमानस पढ़ी है? क्या ऐसे लोग अन्य धर्मग्रंथों के बारे में भी ऐसी मांगें कर सकते हैं। यह सब एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है लेकिन हिंदू सब देख रहा है।
प्रश्न-3. हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर सेतुसमुद्रम योजना पर आगे बढ़ने का केंद्र सरकार से आग्रह किया है। इसे कैसे देखते हैं आप?
उत्तर- यह लोग बात तमिलनाडु के हित की नहीं बल्कि अपने पारिवारिक हित की करते हैं। आज जो मुख्यमंत्री सेतुसमुद्रम योजना पर आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं उनके पिताजी भी ऐसा ही कह चुके थे। लेकिन क्या हुआ? दरअसल यह लोग राम विरोधी हैं। सेतुसमुद्रम परियोजना पूरी करने के लिए सात वैकल्पिक मार्ग हैं लेकिन इन्हें रुचि सिर्फ रामभक्तों की आस्था के प्रतीक रामसेतु को तोड़ने में है। लेकिन इसमें यह कभी सफल नहीं होंगे।
प्रश्न-4. मध्य प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को हिंदू धार्मिक ग्रंथ पढ़ाये जाएंगे और पूजनीय ग्रंथों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। क्या आपको लगता है कि मध्य प्रदेश के निजी स्कूलों को भी हिंदू धार्मिक ग्रंथ पढ़ाने चाहिए और यह सिलसिला अन्य राज्यों में भी चलना चाहिए? सवाल यह भी उठता है कि सिर्फ हिंदू धार्मिक ग्रंथ ही क्यों पढ़ाये जाने चाहिए?
उत्तर- मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला स्वागतयोग्य है। अन्य राज्यों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्रीय स्तर पर सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में वेदों का पाठ कराया जाना चाहिए क्योंकि यह सही दिशा दिखाते हैं। मध्य प्रदेश सरकार के फैसले को हिंदू धार्मिक ग्रंथ बताया जाना भी गलत है क्योंकि वेद सिर्फ धर्म के बारे में शिक्षा नहीं देते बल्कि जीवन के सिद्धांतों से परिचय कराते हैं। वैसे भी दुनिया भर में ऐसी कई महान हस्तियां हुई हैं जो वेदों अथवा हिंदू धार्मिक पुस्तकों से प्रेरणा लेती रही हैं।
प्रश्न-5. आजकल पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री काफी चर्चा में हैं। उनको पाखंडी बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उनकी शक्तियां मात्र छलावा हैं। इन आरोपों को कैसे देखते हैं आप?
उत्तर- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री चूँकि जबरन धर्मांतरण नहीं होने दे रहे और घर वापसी के मिशन पर लगे हुए हैं इसलिए उन पर हमला किया जा रहा है। सनातन धर्म के अनुयायियों पर हमले आदि काल से होते रहे हैं इसलिए इनकी परवाह नहीं करनी चाहिए। लेकिन धीरेंद्र जी को मिल रहा समर्थन दर्शा रहा है कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं।
प्रश्न-6. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मांग की है कि रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाये। इसके साथ ही उन्होंने हिंदू राष्ट्र की बात भी कही है। इस पर विश्व हिंदू परिषद की क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर- हम उनकी बात से सहमत हैं। वैसे रामचरितमानस को किसी औपचारिक दर्जे की जरूरत नहीं है क्योंकि वह तो इस देश की आत्मा है।
प्रश्न-7. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत को महान राष्ट्र बनाना आरएसएस और नेताजी, दोनों का समान लक्ष्य है। लेकिन नेता जी की बेटी ने कहा है कि आरएसएस की विचारधारा और नेताजी के आदर्श अलग-अलग ध्रुव हैं। आज नेताजी के पोते ने कह दिया है कि सावरकर और नेताजी को एक साथ नहीं पूजा जा सकता। इसे कैसे देखते हैं आप?
उत्तर- हमारा मानना है कि महापुरुषों की तुलना नहीं की जा सकती। आजादी की लड़ाई में सभी का योगदान रहा है इसलिए सभी का सम्मान करना चाहिए। लेकिन देश ने देखा है कि कैसे नेताजी के योगदान को कमतर दिखाने का प्रयास किया गया। अब पूर्व की सरकारों की भूल को सुधारा जा रहा है।



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