Netaji की जयंती पर बोले अमित शाह, जो वीर होते हैं वो इतिहास में स्थान प्राप्त करने के लिए किसी के मोहताज नहीं होते

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पोर्ट ब्लेयर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 126 वी जयंती पर आईकॉनिक इवेंट्स वीक का आयोजन हुआ है। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने साफ तौर पर कहा कि आजादी के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भुलाने की बहुत कोशिश हुई। लेकिन जो वीर होते हैं उन्हें इतिहास में स्थान प्राप्त करने के लिए किसी का मोहताज नहीं होना होता। शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद नेताजी को भूलाने का, उनकी भूमिका को छोटा करने का बहुत प्रयास हुआ लेकिन जो वीर होते हैं वो इतिहास में स्थान प्राप्त करने के लिए किसी के मोहताज नहीं होते। उन्होंने कहा कि 
यह दिन ऐतिहासिक है क्योंकि हम उन सभी की वीरता का जश्न मनाते हैं जिन्होंने आजादी से पहले और बाद में भी मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान दिया है।
 

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गृह मंत्री ने कहा कि एक ओर हम सुभाष द्वीप को नेताजी की स्मृति में परिवर्तित कर रहे हैं और दूसरी ओर 21 द्वीपों का नाम उन लोगों के नाम पर रखा जा रहा है जिन्होंने 1947 से इस भूमि की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि जब भी हम नेताजी का नाम सुनते हैं रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इतना साहस, पराक्रम और देशभक्ति शायद ही किसी में होती है। नेताजी के लिए देश का सम्मान, देश की जनता के प्रति ईमान और खुद के स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं था। शाह ने कहा कि इन 21 द्वीपों का नामकरण ‘परमवीरों’ के नाम पर करके पीएम मोदी जी ने न केवल रक्षा बलों का सम्मान किया बल्कि इस देश के युवाओं को हमारे वीरों के जीवन से जोड़ा है और देशभक्ति के बीज बोए हैं।
 

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भाजपा नेता ने कहा कि नेताजी ने कई टोपियां पहनी थीं। उन्होंने कांग्रेस का नेतृत्व किया, फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की और कोलकाता के मेयर भी बने। लेकिन जब उन्होंने महसूस किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत को स्वतंत्रता मिल सकती है, तो वे ब्रिटिश कैद से छूट गए और भारत की स्वतंत्रता पर काम करने के लिए बर्लिन की यात्रा की। शाह ने कहा कि अंडमान निकोबार का इतिहास कौन नहीं जानता? यहीं पर सेल्यूलर जेल है, जहां वीर सावरकर जी ने अपार यातनाओं को सहते हुए कभी न झुकने वाला जज्बा दिखाया था। 1857 से लेकर 1947 तक अनेक कैदियों ने यहां रहकर आजादी के आंदोलन की तपस्या की थी। उन्होंने कहा कि मैं जब भी द्वीप समूह की भूमि पर पैर रखता हूं रोमांचित हो जाता हूं। इस भूमि पर नेताजी ने ध्वज फहरा कर अंडमान को स्वतंत्र किया था और आज वहीं पर नेताजी की स्मृति में एक भव्य स्मारक बन रहा है। देश, नेताजी के उपकारों और ऋण को कभी चुका नहीं सकता।



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