गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली-पंजाब को दहलाने की साजिश, क्या है RDX-IED जिसके इस्तेमाल से होता बड़ा नुकसान

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नई दिल्ली
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी से पहले शुक्रवार दिल्ली, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को दहलाने की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम किया है। राजधानी दिल्ली के गाजीपुर फूल मंडी में आईईडी(IED)मिला जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया। श्रीनगर के ख्वाजा बाजार और पंजाब में भी आरडीएक्स की बड़ी खेप बरामद की गई। गाजीपुर से बरामद आईईडी का वजन करीब तीन किलो था। क्या होता है IED और आरडीएक्स और यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है।

क्या है IED
IED इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यह एक प्रकार से बम होता है जिसका प्रयोग आतंकी व नक्सली आसानी से कर रहे हैं। टिफिन बम या कुकर बम जिसका इस्तेमाल आतंकी करते हैं वो एक प्रकार से आईईडी बम ही है। एक स्विच, फ्यूज, बॉडी, विस्फोटक और बैटरी के जरिए आतंकी इसको तैयार करते हैं। आरडीएक्स, पीईटीएन जब ऐसे उच्च विस्फोटक का इस्तेमाल होता है तो यह बम काफी तबाही मचाने वाला होता है। जब आरडीएक्स नहीं मिलता तो आतंकवादी दूसरे विस्फोटक आर्गेनिक सल्फाइड, चारकोल, नाइट्रेट और ब्लैक पाउडर का इस्तेमाल कर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस आईईडी, टिफिन बम और प्रेशर बम को बनाते हैं।

आरडीएक्स का इस्तेमाल बहुत ही खतरनाक
बम बनाने के लिए जब आरडीएक्स का इस्तेमाल होता है तब यह और भी घातक हो जाता है। हाल ही में लुधियाना कोर्ट में जो ब्लास्ट हुआ उसमें आरडीएक्स के इस्तेमाल की बात कही गई है। एक बार फिर शुक्रवार यानी आज भारी मात्रा में पंजाब में आरडीएक्स बरामद किया गया है। दिल्ली में भी 3 किलोग्राम के करीब जो विस्फोटक बरामद हुआ है उसमें आरडीएक्स भी था। मुंबई ब्लास्ट, पुलवामा इन हमलों में भारी मात्रा में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था।

कब से शुरू हुआ आरडीएक्स का इस्तेमाल
बड़ी मात्रा में आरडीएक्‍स का इस्‍तेमाल सबसे पहले द्वितीय विश्व युद्ध में किया गया था। इसके बाद कई देशों की सेना इसका उपयोग नियंत्रित विस्‍फोट करने के लिए करती है। आरडीएक्स का अर्थ है अनुसंधान और विस्फोटक विकास ( RDX- Research & Development Explosive आरडीएक्स का आविष्‍कार एक जर्मन रसायनविद हेनिंग ने 1899 में शुद्ध सफेद क्रिस्टलाइन्ड पाउडर के रूप में किया था। इस विस्फोट को संयुक्त राज्य अमेरिका में सायक्लोनाइट कहते है। जर्मनी में इसे हेक्सोजेन, तो इटली में टी-4 कहते हैं।


आतंकी संगठन जब करने लगे आरडीएक्स का इस्तेमाल

आतंकी संगठन जिस आरडीएक्‍स का इस्‍तेमाल करते हैं, उसे प्लास्टिक बंधुआ विस्फोटक यानी Plastic Bonded Explosive कहते हैं। सामान्य आरडीएक्स के विस्‍फोट से लगभग 1510 किलो कैलोरी विस्फोटक ऊर्जा पैदा होती है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना घातक है। इस विस्‍फोटक की खास बात यह भी है कि इसे किसी भी शक्‍ल में रखा जा सकता है। यह पानी में घुलता है और ना ही आग में जलता है।

1993 में जब मुंबई में बम धमाके हुए थे तो उसके लिए आरडीएक्‍स को साबुन की शक्‍ल दी गई थी। इसमें ना तो कोई बारूद जैसी गंध होती है और ना ही इसके गिरने या आग के संपर्क में आने से कोई खतरा होता है। आरडीएक्‍स से विस्‍फोट के लिए ड‍ेटोनेटर की जरूरत होती है। यही कारण है कि आतंकी आरडीएक्‍स अलग लाते हैं और डिटोनेटर अलग। इसमें दूसरे विस्‍फोटक मिलाने से प्रभाव और गहरा होता है।


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