कांग्रेस पर भविष्‍यवाणी, छुआछूत पर नाराजगी… सावरकर का मिजाज बता देती हैं ये 5 बातें

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‘सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व, सावरकर माने तर्क, सावरकर माने तारुण्य, सावरकर माने तीर, सावरकर माने तलवार….’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इन्‍हीं शब्‍दों में विनायक दामोदर सावरकर की शख्सियत का बखान किया था। रत्‍नागिरि की जेल में रहते हुए सावरकर ने ही उस हिंदू राष्‍ट्रवादी राजनीतिक विचारधारा को विकसित किया जिसकी नींव पर भारतीय जनता पार्टी खड़ी है। एक नजर सावरकर के उन 5 विचारों पर जो सबसे ज्‍यादा मशहूर हैं।

वीर सावरकर एक बार फिर राजनीतिक भंवर के केंद्र में हैं। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के दावे कि महात्‍मा गांधी के कहने पर सावरकर ने दया याचिका लिखी, पर कांग्रेस समेत विपक्षी दल आगबबूला हो उठे हैं।

कांग्रेस पर भविष्‍यवाणी, छुआछूत पर नाराजगी... सावरकर का मिजाज बता देती हैं ये 5 बातें

‘सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व, सावरकर माने तर्क, सावरकर माने तारुण्य, सावरकर माने तीर, सावरकर माने तलवार….’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इन्‍हीं शब्‍दों में विनायक दामोदर सावरकर की शख्सियत का बखान किया था। रत्‍नागिरि की जेल में रहते हुए सावरकर ने ही उस हिंदू राष्‍ट्रवादी राजनीतिक विचारधारा को विकसित किया जिसकी नींव पर भारतीय जनता पार्टी खड़ी है। एक नजर सावरकर के उन 5 विचारों पर जो सबसे ज्‍यादा मशहूर हैं।

सावरकर की नजर में हिंदू कौन है?
सावरकर की नजर में हिंदू कौन है?

सावरकर मानते थे कि अगर दुनिया को हिंदू जाति का आदेश सुनना पड़े तो वह गीता और गौतम बुद्ध के आदेशों से अलग नहीं होगा।

हिंदू धर्म सम्‍पूर्ण इतिहास है…
हिंदू धर्म सम्‍पूर्ण इतिहास है...

सावरकर ने कहा था, ‘

हिंदू धर्म कोई ताड़पत्र पर लिखित पोथी नहीं जो ताड़पत्र के चटकते ही चूर चूर हो जायेगा, आज उत्पन्न होकर कल नष्ट हो जायेगा। यह कोई गोलमेज परिषद का प्रस्ताव भी नहीं, यह तो एक महान जाति का जीवन है; यह एक शब्द-भर नहीं, अपितु सम्पूर्ण इतिहास है। अधिक नहीं तो चालीस सहस्त्राब्दियों का इतिहास इसमें भरा हुआ है।

किनके बीच हो सकती है मित्रता?
किनके बीच हो सकती है मित्रता?

सावरकर का कहना था कि ‘मनुष्य की संपूर्ण शक्ति का मूल उसके खुद की अनुभूति में ही विद्यमान है।’

प्रशासन के लोगों को सावरकर की सलाह
प्रशासन के लोगों को सावरकर की सलाह

सावरकर मानते थे कि ‘महान लक्ष्य के लिए किया गया कोई भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता है।’

अस्पृश्यता को कलंक मानते थे सावरकर
अस्पृश्यता को कलंक मानते थे सावरकर

सावरकर ने कहा था, ‘हिंदू समाज के, धर्म के, राष्ट्र के करोड़ों हिंदू बंधु इससे अभिशप्त हैं। जब तक हम ऐसे बनाए हुए हैं, तब तक हमारे शत्रु हमें परस्पर लड़वाकर, विभाजित करके सफल होते रहेंगे। इस घातक बुराई को हमें त्यागना ही होगा।’



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