दुर्लभ धातु चीन का अगला आर्थिक हथियार | Rare Metals China’s Next Economic Weapon | Patrika News

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कैलिफोर्निया स्थित ‘माउंटेन पास रेयर अर्थ खान’ उत्तरी अमरीका में एकमात्र खदान है जहां उच्चतम गुणवत्ता वाले रेयर-अर्थ के खनन और प्रसंस्करण की सुविधा मौजूद है। हालांकि, संघीय और कॉरपोरेट के बढ़ते हितों को देखते हुए खदानों की संख्या बढऩे की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया का लिनास कॉर्प, आरईई का दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक उत्पादक है। अमरीकी रक्षा विभाग ने टेक्सास के रियो होंडो में प्रसंस्करण सुविधा निर्माण के लिए लिनास रेयर अर्थ लिमिटेड को 30.4 मिलियन डॉलर की राशि स्वीकृत की है। बाइडन प्रशासन की योजना आरईई पर चीनी निर्भरता कम करने की है। आरईई के निर्यात की सीमा बांधने के चीनी संकेतों ने अन्य देशों को काफी प्रभावित किया है, विशेषकर फ्रांस, इटली और जापान को, जिनके पास रेयर अर्थ के संसाधन नहीं हैं। 2011 में कैलिफोर्निया स्थित माउंटेन पास खदान से पुन: उत्पादन की शुरुआत और 2010 में ऑस्ट्रलिया की लिनास कॉर्प की पश्चिमी ऑस्ट्रलिया स्थित माउंट वेल्ड खदान का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद आने वाले वर्षों में दोनों खदानों से लगभग 30,000 टन रेयर-अर्थ्स की आपूर्ति होगी जिससे चीन उत्पादित रेयर-अर्थ्स की मांग में कमी आएगी। हालांकि, माउंटेन पास और माउंट वेल्ड मुख्य रूप से लाइट रेयर अथ्र्स वाली खान हैं जबकि इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को अधिक गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए हैवी रेयर अर्थ्स की जरूरत होती है। वर्तमान में, चीन ही एक ऐसा देश है जो लाइट और हैवी दोनों तरह के रेयर अर्थ्स की आपूर्ति कर सकता है। कम से कम अगले कुछ वर्षों तक तो चीन ही इनका बड़ा आपूर्तिकर्ता देश बना रहेगा।

कुछ समय से यह भी चर्चा में है कि बीते कुछ वर्षों से विवादित भारत-चीन सीमा पर चीन अपनी ओर व्यापक खनन में रुचि ले रहा है। कथित रूप से क्षेत्र में सोने, चांदी समेत बहुमूल्य खनिज पदार्थों के भंडार मौजूद होने की अटकलें हैं। अक्साई चीन और पूर्वी लद्दाख के इलाके थोरियम, यूरेनियम जैसी खनिज सम्पदा से भरपूर हैं और पारा, लोहा व निकल के भंडार होने की भी संभावना है। भारत ने यहां कभी खनन नहीं किया है।
नेपाल में भी दुर्लभ और कीमती खनिजों के भंडार हैं। यहां 85 से अधिक तरह की बहुमूल्य धातुओं के होने की खबरें हैं। वर्तमान में चीन की व्यापक खनन गतिविधियां अरुणाचल से सटे लुंजे काउंटी में चल रही हैं। यह इलाका तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में है- अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से बमुश्किल 15 किमी. दूर। वैज्ञानिकों के अनुसार, लुंजे और आसपास के क्षेत्रों में खोजे गए अयस्कों का मूल्य 58 बिलियन डॉलर तक हो सकता है। बीते कुछ वर्षों से चीन, अरुणाचल को तिब्बत का भाग साबित करने की कोशिशों में जुटा है। भारत को चीन के साथ किसी भी सीमा विवाद के निस्तारण में सावधानी बरतनी होगी, विशेषकर 1 जनवरी 2022 से प्रभावी चीन के ‘नए भूमि सीमा कानूनों’ को देखते हुए। भारत को ढांचागत विकास में तेजी लाने, कनेक्टिविटी बढ़ाने, सीमा-सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ही आरईई खनन को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए कदम उठाने की भी जरूरत है।

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