आपकी बात, भारत में धार्मिक संस्थाओं को ज्यादा दान क्यों मिलता है? | Why do religious institutions get more donations in India? | Patrika News

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जहन में है धार्मिकता
भारत में बचपन से ही बच्चे को धार्मिक गतिविधियों और दान-दक्षिणा से जोड़ दिया जाता है, जिससे व्यक्ति की भावनाएं धार्मिक स्थल से जुड़ जाती हैं। धार्मिक गतिविधियों के लिए धार्मिक संस्थाएं प्रचार-प्रसार भी करती हैं, जिससे धार्मिक संस्थाओं को ज्यादा दान मिलना स्वाभाविक है।
-संजय रोहर मासलपुर, करौली
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धर्म में आस्था का परिणाम
भारत में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। सभी धर्मों के लोगों की अपने-अपने धर्म में आस्था है और वे धार्मिक संस्थाओं को दान भी देते हैं।
-भगवती प्रसाद, नागौर
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परंपरा का परिणाम
प्राचीन काल से ही दान करने की परंपरा चली आ रही है। धर्म के नाम पर दान करना शुभ समझा जाता है। यह मानसिकता सदियों से चली आ रही है। लोगों की धर्म में आस्था और विश्वास की वजह से ही सबसे ज्यादा दान धार्मिक संस्थाओं को मिलता है। लोग गरीब को एक रुपया भी देते हुए सोचते हैं, लेकिन धार्मिक संगठनों को लाखों का चंदा दे आते हैं। हकीकत में देखा जाए तो आजकल धर्म में राजनीति का आगमन हो चुका है और बहुत से नेता लोग इसका इस्तेमाल सत्ता में आने के लिए सीढ़ी के रूप में ही करते दिखते हैं। यदि धार्मिक संस्थाओं में दिए गए पैसों को गरीबी मिटाने और विकास के कार्यों में खर्च किया जाए तो देश की तस्वीर कुछ और ही होगी।
-रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर
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दान का महत्व
सभी धर्मों में दान का महत्व है। लोग दान-पुण्य में ज्यादा विश्वास करते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के लोग ईश्वर में आस्था रखते हैं और धार्मिक संस्थाओं को ज्यादा से ज्यादा दान देते हैं।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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भारतीय संस्कृति आस्था प्रधान
भारत भूमि अवतारों की जन्मभूमि है। भारतीय संस्कृति आस्था प्रधान है। भारतीय संस्कृति में दान-पुण्य को सर्वोपरि माना गया है। इसलिए लोग धार्मिक संस्थाओं को खुलकर दान करते हैं। संस्थाएं भी दान से प्राप्त राशि सामाजिक सरोकारों पर खर्च कर जन कल्याण का कार्य करती रहती है।
-आजाद कृष्णा राजावत, निहालपुरा
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धार्मिक कार्यों के लिए दान
भारतीय संस्कृति पुनर्जन्म एवं कर्म फल पर विश्वास करती है। चार पुरुषार्थ में सबसे अधिक जोर धर्म पुरुषार्थ पर दिया जाता है। धर्म में चार चीजों पर जोर दिया गया है- दान, शील, तप और भावना। इसलिए धार्मिक कार्यों के लिए खूब दान दिया जाता है।
-गिरीश कुमार जैन, कोटा
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आस्था और अंधविश्वास
मंदिरों में बहुत ज्यादा दान आता है। इसके पीछे आस्था और अंधविश्वास है। लोग ईश्वर से उम्मीद रखते हैं कि भगवान भला करेंगे, तो दूसरी ओर डर के कारण दान देते हैं कि दान न किया तो भगवान पाप देंगे।
-प्रियव्रत चारण, जोधपुर
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किस्मत पर भरोसा ज्यादा
ज्यादातर भारतीय अंधविश्वासी हैं। मेहनत पर कम और किस्मत पर अधिक भरोसा करते हैं। इसलिए धार्मिक संस्थाओं को ज्यादा दान मिलता है। लोग जात-पात, धर्म में उलझे हुए हैं।
-नीरू हजारिका, असम

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