जब मार्केट में हो तेजी तो खरीदें या बेचें स्‍टॉक? जानिये दिग्‍गज इन्‍वेस्‍टर Howard Marks से

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नई दिल्‍ली. मार्केट जब तेज होती है तो यह बहुत से निवेशकों में घबराहट पैदा करती है. इन्‍वेस्‍टर्स को लगता है कि मार्केट (stock market) का पीक आ चुका है और यह कभी भी बैक गियर लगा सकती है. ऐसे में वे बिकवाली करके प्रॉफिट जेब में डालने में विश्‍वास रखते हैं. लेकिन क्‍या उनका यह विश्‍वास निवेश के लिहाज से सही है?

मशहूर निवेशक होवार्ड मार्क्‍स (Howard Marks) की नजर में तो यह एक भयंकर गलती है. मार्क्‍स का कहना है कि इक्विटी निवेशक (equity invester) का निर्णय अगर किसी डर पर आधारित है तो, निश्चित ही वह गलत फैसला ही होगा. मार्क्‍स का कहना है कि निवेश में डर, हड़बड़ी और मनोवैज्ञानिक धारणाओं का कोई स्‍थान नहीं है. जब मार्केट तेज हो तो क्‍या करना चाहिये, जानिये, होवार्ड मार्क्‍स (Howard Marks Investment tips) से ..

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तेजी में बिकवाली सबसे बड़ी भूल

मार्क्‍स का कहना है कि जब मार्केट ऊपर जा रही होती है तो बहुत से इन्‍वेस्‍टर्स एक गलती करते हैं. वो गलती है शेयर्स बेच देना (share selling). वो सोचते हैं कि अब गिरावट अवश्‍वंभावी है और वे यहां अपने स्‍टॉक्‍स बेचकर भावी लॉस को टाल रहे हैं. जबकि करना ये चाहिये कि या तो खरीददारी करनी चाहिये या फिर शेयर होल्‍ड करने चाहिये. क्‍योंकि प्राय: यह देखा गया है कि जो बाजार चढ़ते हैं, वो आगे ही बढ़ते जाते हैं. इसलिये निवेशक को लॉग टर्म में आने वाले रिटर्न पर ध्‍यान देना चाहिये, न कि अभी बेचने से हो रहे प्रॉफिट को देखना चाहिये. मार्क्‍स का कहना है कि निवेश का अर्थ है कैपिटल को बड़े ही तार्किक तरीके से किसी शेयर की संभावनाओं का आंकलन करके लॉंग टर्म में एसेस्‍ट में बदलना है. न कि बस कुछ पैसे अपनी अंटी में डालना.

प्रॉफिट टेकिंग नहीं है अच्‍छी रणनीति

प्रॉफिट टेकिंग (profit taking) सुनने में भले ही अच्‍छा लगे, लेकिन यह अच्‍छी रणनीति नहीं है. मार्क्‍स का कहना है कि प्रॉफिट से कभी किसी को नुकसान नहीं होता, वाली धारणा शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिये तो हितकर है, परंतु पेशेवर लॉंग टर्म निवेशकों (professional invester) के लिये इसे अपनाना अपने पैर पर कुल्‍हाड़ी मारने जैसा है. इसलिये अगर मार्केट तेज है. आपको अच्‍छे रिटर्न मिल रहे हैं तो भी प्रॉफिट टेकिंग की बजाय मार्केट में बने रहना चाहिये. इससे लॉंग टर्म में आपको बहुत फायदा होगा.

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डर नहीं हो सकता निवेश निर्णय का आधार

मार्क्‍स का कहना है कि बिकवाली करने के बहुत से अच्‍छे कारण हो सकते हैं. लेकिन अगर आप केवल गलती होने या घाटा होने के डर मात्र से बिकवाल बन जाते हैं, तो ये आपके लिये बहुत घातक है. बिकवाली का निर्णय (selling decision )निवेश के दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिये जो ठोस वित्‍तीय विश्‍लेषण, दृढ निश्‍चय और निवेश अनुशासन से बना हो. यह निर्णय कभी निवेशक (investor) के मनोविज्ञान (psychology) पर आधारित नहीं हो सकता.

दूसरों की गलतियों से फायदा

मार्क्‍स का मानना है सफल निवेश निर्णय दूसरों की गलतियों को देखकर लिये जाते हैं. अगर कोई डर कर शेयर बेच रहा है तो उसकी यह गलती एक सच्‍चे निवेशक को खरीददारी करने एक बेहतरीन मौका दे रही है. और उसे डरे हुये इंसान की गलती से लाभ कमाना चाहिये. मार्केट गुरू का कहना है कि निवेश निर्णय का आधार किसी भी एसेस्‍ट की क्षमताओं का सही मूल्‍यांकन होता है. यह निर्णय केवल इस आधार पर नहीं हो सकता कि मार्केट बहुत तेज हो चुकी है और अब यह गिरेगी.

पोर्टफोलियो में तुरंत हेरफेर ठीक नहीं

होवार्ड मार्क्‍स का कहना कि अगर को कोई निवेशक मार्केट की पल-पल बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने पोर्टफोलियो में जल्‍दी-जल्‍दी बदलाव करता है तो वो कमाई नहीं कर सकता. तेजी में एक बार बेचना, फिर खरीदना और फिर बेचना बिल्‍कुल गलत रणनीति है. इसलिये जब मार्केट तेज हो तो अपने दिल को दिमाग पर हावी न होने दें और लॉंग टर्म रणनीति पर काम करें.

Tags: Investment tips, Stock market


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